ब्रिटेन के वैज्ञानिकों को पृथ्वी से करीब 120 प्रकाश वर्ष दूर एक ग्रह पर एलियन जीवन के संकेत मिले हैं। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिको का कहना है कि उन्होंने 'के2-18बी' नाम के इस सुदूर ग्रह पर जीवन से जुड़ी गतिविधि का अब तक का सबसे अच्छा संकेत देखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, शोध में शामिल भारतवंशी वैज्ञानिक प्रोफेसर निक्कू मधुसूदन का कहना है कि नई खोज ने इस उम्मीद को पुख्ता किया है कि शायद हम ब्रह्मांड में अकेले नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक शोध एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में छपा है। इसे खगोल जीव विज्ञान के क्षेत्र में परिवर्तनकारी खोज माना जा रहा है।'के2-18बी' आकार में पृथ्वी से करीब ढाई गुना बड़ा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पानी से ढका हो सकता है। वैज्ञानिकों ने ग्रह के वायुमंडल में दो रसायन डाइमेथिल सल्फाइड (डीएमएस) व डाइमेथिल डाइसल्फाइड (डीएडीएस) की पहचान की है।
'के2-18बी' पर कई महासागर और हाइड्रोजन युक्त वायुमंडल है। प्रोफेसर मधुसूदन ने कहा है कि फिलहाल हम नहीं जानते कि उन महासागरों का तापमान क्या होगा, लेकिन शायद पृथ्वी से कुछ गर्म होंगे। शोध के लिए
जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप से मिले डेटा का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों का दावा है कि शोध के नतीजे इतने पुख्ता हैं कि सिर्फ 0.3 प्रतिशत संभावना है कि 'के2-18बी' पर रसायन संयोग से बने होंगे।
'के2-18बी' हमारे सूरज जैसे तारे की बजाय लाल बौने ठंडे तारे की परिक्रमा करता है। यह अपने तारे से न ज्यादा दूर है, न ज्यादा पास। सिंह तारामंडल के इस गृह का वजन पृथ्वी से कई गुना ज्यादा है। वैज्ञानिकों का
मानना है कि यह 'हाइसीन ग्रह' हो सकता है। यानि ऐसा ग्रह, जहां ढेर सारा पानी और जीवन के लिए सही माहौल हो। ऐसे ग्रह पर पानी जमने या उड़ने के बजाय तरल रूप में रह सकता है।
हालांकि खोज बेहद रोमांचक है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि ये रसायन जीवन का संकेत तो हैं, लेकिन 100 फीसदी पक्का नहीं है कि वहां जीव हैं। हो सकता है कोई और प्राकृतिक प्रक्रिया इन रसायनों को बना रही हो। हालांकि अब तक ऐसी कोई प्रक्रिया खोजी नहीं गई है। वैज्ञानिक और परीक्षण करेंगे, ताकि पक्का हो सके कि ये रसायन वाकई जीवों ने बनाए हैं।
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