पर्यटन का नया केंद्र बनेगा पटना का गंगा तट – बनेगा जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान

Jitendra Kumar Sinha
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राजधानी पटना के गंगा तट को अब एक भव्य पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत “जेपी गंगा पथ समग्र उद्यान (फेज-1)” नामक एक बड़ी परियोजना की शुरुआत हो रही है, जिसकी लागत 387.40 करोड़ रुपये तय की गई है। इस योजना को 49.7 हेक्टेयर क्षेत्र में दो वर्षों में पूरा किया जाएगा।


इस परियोजना के तहत गंगा तट पर रिवर फ्रंट, तितली उद्यान, वानिस्थितिका उद्यान, फूड कोर्ट, महिला हाट, पैदल पथ, साइकिल ट्रैक और बड़ी पार्किंग सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। इस पूरे क्षेत्र का 90% हिस्सा हरित और खुला रखा जाएगा, जिसमें एक लाख पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। इससे पटना की हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण संतुलन बेहतर होगा।


पथ निर्माण विभाग ने बताया कि इस परियोजना में 8 हेक्टेयर क्षेत्र में नक्षत्रों पर आधारित वानिस्थितिका उद्यान तैयार किया जाएगा, जिसकी थीम पारंपरिक खगोलशास्त्र होगी। तितली उद्यान बच्चों और पर्यटकों को प्रकृति से जोड़ने में मदद करेगा। इसके अलावा 6 किलोमीटर लंबा पैदल पथ गंगा के किनारे बनेगा, जिससे लोग आराम से सैर कर सकेंगे।


यहां वाहनों की भी बड़ी व्यवस्था की गई है। कुल 4,000 चारपहिया और 13,000 दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा बनाई जाएगी। पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि यह परियोजना पटना के विकास, पर्यटन और सांस्कृतिक समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम है।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 21 फरवरी को अपनी प्रगति यात्रा के दौरान इस योजना की घोषणा की थी। उसी के तहत अब बिहार राज्य पथ निर्माण निगम लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए निविदा आमंत्रण की अधिसूचना जारी कर दी है।


यह योजना दीघा से गांधी मैदान तक गंगा पथ के दोनों ओर लगभग 7 किलोमीटर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। मंत्री नितिन नवीन ने कहा कि मुख्यमंत्री की सोच के अनुसार इस योजना को समय पर पूरा करना हमारी प्राथमिकता है। केवल दो माह में निविदा प्रक्रिया शुरू कर देना हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है।


निविदा दस्तावेज 27 अप्रैल से 26 मई 2025 तक दोपहर 3 बजे तक बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल से डाउनलोड और अपलोड किए जा सकेंगे। एजेंसी का चयन प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया से किया जाएगा और निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखा जाएगा।


इस परियोजना से न केवल राजधानी पटना का सौंदर्य बढ़ेगा, बल्कि यह गंगा तट को पर्यटन और संस्कृति का नया केंद्र बनाएगा। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी इसका लाभ मिलेगा।

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