देश की ग्रामीण तस्वीर बदलने और गांवों को आत्मनिर्भर एव विकसित बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में शुरू की गई थी “सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY)” अब धीरे-धीरे नेताओं की प्राथमिकता सूची से गायब होता जा रहा है। ताजा हालात यह बताता है कि 2024 में निर्वाचित सांसदों ने अब तक अपने आदर्श ग्रामों का चयन ही नहीं किया है, जबकि उनके कार्यकाल का एक साल पूरा हो चुका है।
ग्रामीण विकास विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में केवल 2019 में निर्वाचित सांसदों द्वारा चयनित गांवों में हुए विकास कार्यों की समीक्षा जारी है। नई संसद के गठन के बाद 2024 में जीते सांसदों से यह अपेक्षा किया जा रहा था कि वह नई पंचायती क्षेत्रों का चयन करेंगे, लेकिन अधिकांश सांसदों ने इस दिशा में कोई पहल नही किया है।
सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत कुल 6265 परियोजनाएं अब तक बनाई गईं है, जिनमें सिर्फ 2083 योजनाएं ही पूरी हो सका है। 10 वर्षों में कुल 208 पंचायतों का चयन हुआ है, लेकिन उनमें भी महज 117 के लिए ही विकास योजनाएं बन पाईं है। शेष गांवों में योजनाओं की सिर्फ घोषणा हुई है, कार्यान्वयन नहीं।
वर्ष 2014 से 2019 के बीच कुल 81 पंचायतों का चयन किया गया था, लेकिन केवल 60 पंचायतों के लिए योजनाएं बन पाईं हैं। 1897 परियोजनाएं पूरी हुईं, जबकि शेष योजनाएं कागजों में सिमटकर रह गईं। रिपोर्ट बताता है कि लगभग 48.61% योजनाओं पर कार्य शुरू ही नहीं हो सका है।
2019 में सांसदों ने 127 पंचायतों को गोद लिया था, लेकिन केवल 57 पंचायतों के लिए योजनाएं बनीं। कुल 1441 परियोजनाओं में से सिर्फ 186 योजनाएं ही पूरी हो सकी, जबकि 1107 परियोजनाएं अभी शुरू भी नहीं हो सकी है। यह आंकड़ा यह साफ दर्शाता है कि सांसदों की सक्रियता लगातार घटती जा रही है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि 2024 में जीते सांसदों ने अब तक कोई पंचायत ही चयनित नहीं किया है। इससे यह स्पष्ट है कि इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर राजनीतिक इच्छाशक्ति कमजोर हो गई है। सांसद आदर्श ग्राम योजना का उद्देश्य था कि नेता एक-एक गांव को ‘मॉडल’ बनाएं, ताकि बाकी गांव भी उनसे प्रेरणा लें। लेकिन नेताओं की रुचिहीनता और काम की धीमी रफ्तार के कारण यह योजना महज एक दस्तावेज बनकर रह गया है। अगर समय रहते इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं हुआ, तो ग्रामीण विकास का यह सपना अधूरा ही रह जाएगा।
