गरुड़ पुराण की चेतावनी: कभी न पहनें उपचारित रत्न

Jitendra Kumar Sinha
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रत्न पृथ्वी की गहराइयों से निकलने वाले प्राकृतिक, बहुमूल्य खनिज होते हैं जिन्हें शुभता, समृद्धि, सफलता, स्वास्थ्य, संतोष और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि ये प्राकृतिक रत्न wearer (धारण करने वाले) के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाकर बाधाओं को दूर करते हैं और संतुलित जीवन जीने में सहायता करते हैं।


जब रत्न पृथ्वी से निकाले जाते हैं, तो उनकी गुणवत्ता के अनुसार उन्हें विभिन्न आकारों और डिजाइनों में तराशा जाता है। किसी रत्न की गुणवत्ता का मूल्यांकन उसके रंग की तीव्रता, पारदर्शिता, चमक, अंदरूनी दोष (inclusions), और विशेष प्रकाशीय गुणों के आधार पर किया जाता है। उच्च गुणवत्ता वाले, स्वच्छ और विशुद्ध रंग वाले रत्न ज्योतिषीय उपयोग और आभूषणों के लिए अत्यंत मांग में रहते हैं।


लेकिन बढ़ती मांग और अधिक मूल्य के कारण कम गुणवत्ता वाले रत्नों को अक्सर उपचारित (treated) किया जाता है ताकि उनका रंग, चमक या पारदर्शिता बेहतर दिखे। इन उपचारों में हीटिंग, कोटिंग, डाई करना, तेल भरना, ब्लीचिंग, विकिरण (radiation), ग्लास फिलिंग और वैक्सिंग जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। यह उपचार रत्न की प्राकृतिक संरचना को बदल देते हैं।


उदाहरण के लिए, अमेथिस्ट को गरम करके उसका रंग बदलकर सिट्रीन जैसा पीला किया जा सकता है, हालांकि दोनों क्वार्ट्ज की ही श्रेणी में आते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में रत्न की प्राकृतिक ऊर्जा और कंपन (vibrations) बदल जाती है। ऐसे उपचारित रत्न ज्योतिषीय दृष्टि से प्रभावहीन हो जाते हैं, और कई बार नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकते हैं।


गरुड़ पुराण के अध्याय 72 के अनुसार, किसी भी रत्न को उसके सौंदर्य सुधार के लिए गर्म नहीं किया जाना चाहिए। ऐसा करने से वह रत्न रोग, दुर्भाग्य और नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकता है। यह प्राचीन ग्रंथ स्पष्ट रूप से बताता है कि ज्योतिषीय लाभ के लिए केवल प्राकृतिक, अप्राकृतिक (untreated) रत्न ही पहनने योग्य होते हैं


यद्यपि नेत्रों से स्वच्छ और रंगीन रत्न अधिक आकर्षक होते हैं, वे महंगे भी हो सकते हैं। लेकिन यह हमेशा बेहतर होता है कि कोई रत्न न पहनें, बजाय इसके कि आप एक उपचारित रत्न पहनें जो लाभ तो नहीं देगा, उल्टा हानि पहुंचा सकता है। यदि बुद्धिमानी से चुना जाए, तो उचित बजट में भी प्रभावशाली प्राकृतिक रत्न मिल सकते हैं।


एकमात्र अपवाद है पन्ना (Emerald)। यह रत्न स्वभाव से ही नाजुक होता है और हीट के प्रति संवेदनशील होता है। इसे केवल रंगहीन तेल से हल्का उपचार देना स्वीकार्य है ताकि उसकी संरचना सुरक्षित रहे। लेकिन कोई भी रंगीन तेल या ऐसा उपचार जो रत्न की प्रकृति को बदल दे, वह ज्योतिष के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।


ज्योतिषीय रत्न खरीदते समय ध्यान रखें:

  • केवल प्राकृतिक और अप्राकृतिक (untreated) रत्न ही खरीदें

  • किसी प्रमाणित रत्न विशेषज्ञ (qualified gemologist) से ही रत्न लें

  • हमेशा किसी विश्वसनीय लैब का प्रमाणपत्र माँगें जिसमें रत्न के उपचार की स्पष्ट जानकारी हो

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