अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बावजूद ईरान के प्रमुख परमाणु साइट्स — फोर्डो, नटान्ज़ और इस्फ़हान — भले ही क्षतिग्रस्त हुए हों, लेकिन उन्हें पूरी तरह नष्ट नहीं किया जा सका। प्रारंभिक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक इस हमले ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को मात्र कुछ महीनों तक ही पीछे धकेला है; बुनियादी ढांचे अब भी काफी हद तक बरकरार हैं।
CNN और Reuters के अनुसार, DIA (Defense Intelligence Agency) ने बताया कि “एन्रिच्ड यूरेनियम की स्टॉक और सेंट्रीफ्यूज ज्यादातर बरकरार हैं,” और फोर्डो तथा नटान्ज़ साइट्स नीचे तक नहीं बिगड़ीं ।
इसके विपरीत, व्हाइट हाउस ने इन रिपोर्ट्स को "गलत" और "राष्ट्रपति ट्रंप को बदनाम करने का प्रयास" करार दिया है। उन्होंने प्रेस सचिव कैरोलाइन लीविट के हवाले से कहा कि “14 × 30,000‑पाउंड के बमों की सही निशानेबाज़ी से पूरी तरह विनाश हुआ।” ।
इसी बीच, CNN ने भी बताया कि सतह पर कुछ क्रेटर बने हैं, लेकिन गहरे भूमिगत संरचनाओं पर इसका असर सीमित दिखता है।
इस मसले पर US कांग्रेस के एक हिस्से ने ट्रंप प्रशासन को नए सिरे से कांग्रेसी ब्रीफिंग देने का दबाव डाला है, और कई कानूनविदों ने बिना कांग्रेसी मंज़ूरी की कार्रवाई को असंवैधानिक बताया है ।
