नई दिल्ली स्थित मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (MAIDS) में देश का पहला सेंट्रल टिशू बैंक शुरू किया गया है। यह पहल न केवल चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि उन मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगी जिन्हें प्रतिरोपण (transplantation) के लिए ऊतक (tissues) की आवश्यकता पड़ती है।
अभी तक मरीजों को प्रतिरोपण के लिए आवश्यक ऊतक या सामग्री बाजार से खरीदनी पड़ती थी। यह प्रक्रिया न केवल महंगी थी बल्कि कई बार मरीजों को सही और गुणवत्तापूर्ण सामग्री भी समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती थी। ऐसे में सेंट्रल टिशू बैंक मरीजों की जरूरतों को पूरा करेगा और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाएगा।
सेंट्रल टिशू बैंक का मुख्य उद्देश्य है मरीजों को प्रतिरोपण के लिए ऊतक उपलब्ध कराना। बाजार से महंगी और बाहरी सामग्री पर निर्भरता कम करना। डॉक्टरों और अस्पतालों को समय पर सुरक्षित ऊतक उपलब्ध कराना। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाना। यह कदम चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (self-reliance) की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास है।
इस अवसर पर एक और उपलब्धि दर्ज की गई है। दिल्ली डेंटल काउंसिल देश की पहली स्टेट डेंटल काउंसिल बन गई है जिसने कैशलेस ‘वी-ऑफिस’ सिस्टम लागू किया है। इसके तहत डॉक्टरों, मरीजों और संबंधित संस्थाओं के बीच सभी लेन-देन डिजिटल माध्यम से होंगे। इससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
सेंट्रल टिशू बैंक और वी-ऑफिस सिस्टम से मरीजों को कई लाभ होंगे, उपचार की लागत कम होगी। ऊतक समय पर और सुरक्षित तरीके से मिल सकेंगे। मरीजों को बाजार की अनिश्चितता और दलाली से मुक्ति मिलेगी। तकनीकी रूप से सटीक और विश्वसनीय इलाज संभव हो सकेगा।
भारत स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। अंग और ऊतक प्रत्यारोपण जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने से देश में चिकित्सा सुविधाएं विश्व स्तर की बन रही हैं। सेंट्रल टिशू बैंक की शुरुआत इस दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
दिल्ली में शुरू हुआ देश का पहला सेंट्रल टिशू बैंक और दिल्ली डेंटल काउंसिल का कैशलेस वी-ऑफिस सिस्टम चिकित्सा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला है। यह पहल न केवल मरीजों की कठिनाइयों को कम करेगी बल्कि भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में और मजबूत बनाएगी।
