डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यह उनकी लड़ाई नहीं है, बल्कि पूरी तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की जंग है। ट्रंप का दावा है कि अगर वे सत्ता में होते तो यह युद्ध बहुत पहले ही खत्म हो चुका होता, क्योंकि वे रूस और यूक्रेन दोनों पर दबाव डालकर समझौता कराने में सक्षम थे।
ट्रंप ने बाइडेन प्रशासन और नाटो देशों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नाटो देश दिखावे में रूस के खिलाफ खड़े हैं, लेकिन व्यवहार में रूस से तेल और गैस खरीदकर उसी को मजबूत कर रहे हैं। ट्रंप के अनुसार, यह नीति दोहरी है और युद्ध को और लंबा खींच रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर नाटो वास्तव में युद्ध खत्म करना चाहता है, तो उसे रूस से ऊर्जा की खरीद तुरंत बंद करनी होगी और उस पर कड़े टैरिफ लगाने होंगे।
ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि इस युद्ध में सबसे बड़ा छिपा खिलाड़ी चीन है। उनका कहना था कि रूस की असली ताकत चीन की मदद पर टिकी है। यदि चीन को आर्थिक और राजनीतिक रूप से मजबूर किया जाए कि वह रूस से हाथ खींच ले, तो युद्ध अपने आप थम जाएगा।
उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि युद्ध की मानवीय कीमत बेहद भयावह है। केवल पिछले हफ्ते ही 7,118 लोग मारे गए, जबकि हर हफ्ते हजारों लोग इस संघर्ष में अपनी जान गंवा रहे हैं। ट्रंप ने इसे “बेहूदगी और विफल कूटनीति” का नतीजा बताया और कहा कि बाइडेन और जेलेंस्की इस युद्ध को खींचकर मानवता को भारी नुकसान पहुँचा रहे हैं।
उनके इस बयान ने अमेरिका और यूरोप की राजनीति में फिर से हलचल मचा दी है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप जानबूझकर रूस के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं, जबकि समर्थकों का मानना है कि उनका दृष्टिकोण व्यावहारिक है और अगर वे सत्ता में होते तो युद्ध का इतना बड़ा विस्तार कभी नहीं होता।
