दक्षिण एशिया के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में हाल ही में सैन्य हलचलों ने सबका ध्यान खींचा है। एक तरफ बांग्लादेश के चटगांव में अमेरिकी सैनिक तैनात हुए हैं, वहीं दूसरी ओर भारत ने म्यांमार भेजी है अपनी तीनों सेनाओं की एक टुकड़ी। ये दोनों ही कदम भारत-म्यांमार सीमा के अस्थिर राखाइन प्रांत और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
बांग्लादेश के चटगांव शहर में करीब 100 से अधिक अमेरिकी सैनिक पहुंचे हैं। अमेरिका-बांग्लादेश-श्रीलंका के संयुक्त अभ्यास ‘ऑपरेशन पैसिफिक एंजल 25-3’ के हिस्से के रूप में ये गतिविधियाँ हो रही हैं जिसमें वायु और जमीन दोनों प्रकार की तैनाती सम्मिलित है। इस अभ्यास का उद्देश्य हवाई, जमीनी और चिकित्सा आपातकालीन संचालन की क्षमता को बढ़ाना बताया गया है।
इसी अवधि में भारत ने भी म्यांमार के नायपीडॉ में तीनों – थल सेना, नौसेना और वायुसेना – की लगभग 120 जावानों को भेजा है। यह कदम भारत-म्यांमार मिलिट्री कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसमें दोनों देशों के बीच सैनिक, सांस्कृतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की जाती है।
विश्लेषकों का मानना है कि ये सक्रियताएँ सिर्फ़ अभ्यास नहीं हैं, बल्कि भू-राजनीतिक रूप से बड़ी छवि का हिस्सा हैं। अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति, पूर्वी सीमा सुरक्षा, चीन का बढ़ता प्रभाव और म्यांमार में विद्रोही समूहों व सैनिक सरकार के बीच संघर्ष इस सबकी पृष्ठभूमि में हैं।
भारत के लिए ये झंझट खास है क्योंकि पूर्वोत्तर राज्य, म्यांमार के साथ सीमा, और इन क्षेत्रों के विकास व कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स सब कुछ इस रिश्ते से प्रभावित हैं। इस स्थिति में भारत संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्वतंत्र नीति दोनों बची रहें।
