महागठबंधन में सीटों के बंटवारे का औपचारिक एलान हुए बिना ही RJD ने उम्मीदवारों को सिंबल देना शुरू कर दिया है। अब तक 84 से अधिक उम्मीदवारों को पार्टी ने सिम्बल दिए हैं, जिनमें वे सीटें भी शामिल हैं जहां पिछली बार गठबंधन की अन्य पार्टियाँ मैदान में थीं। पार्टी ने 35 उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक की है। टिकट बंटवारे में मुस्लिम और यादव समुदाय को विशेष ध्यान दिया गया है। पार्टी ने पुराने चेहरों पर भरोसा जताया है — 22 मौजूदा विधायकों को पुनः उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि दो सीटों पर विधायक के बेटे मैदान में उतरेंगे। उदाहरण के लिए, सीवान की रघुनाथपुर सीट पर ओसामा साहेब को प्रत्याशी बनाया गया है, जो सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन के बेटे हैं, और इससे मौजूदा विधायक हरिशंकर यादव को टिकट नहीं मिला।
राजद ने टिकट बंटवारे में अपने जनाधार वोट — विशेषकर मुस्लिम और यादव — का पूरा ख्याल रखा है। अब तक 35 में से 18 यादवों को उम्मीदवार बनाया गया है, वहीं 3 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। एससी श्रेणी के 4, अतिपिछड़ा और सवर्ण वर्ग से 4-4 उम्मीदवार बनाए गए हैं। पार्टी ने छह नए चेहरे भी मैदान में उतारे हैं। बोचहां से अमर पासवान, मुंगेर से मुकेश यादव तथा रघुनाथपुर से ओसामा साहेब जैसे नाम शामिल हैं।
राजद में परिवारवाद की छवि स्पष्ट दिख रही है। बेलागंज से पिछली बार जीतने वाले सुरेंद्र यादव की जगह इस बार उनके बेटे विश्वनाथ यादव को उम्मीदवार बनाया गया है। मुंगेर से प्रत्याशी मुकेश यादव, जमुई से अर्चना कुमारी के पति, हसनपुर से माला पुष्पम (उनके पति सुनील पुष्पम पूर्व विधायक) तय किए गए हैं। बनियापुर से चांदनी सिंह (पूर्व विधायक अशोक सिंह की पत्नी) और संदेश की विधायक किरण देवी के बेटे दीपू यादव को टिकट मिला है।
कुल मिलाकर, राजद ने टिकट बंटवारे में सामाजिक समीकरण और वफादार समर्थकों की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए मुस्लिम और यादव समुदाय पर केंद्रित रणनीति अपनाई है, साथ ही राजनैतिक परिवारों को भी महत्व दिया गया है।
