केरल में बर्ड फ्लू ने दी दस्तक - “अलप्पुझा और कोट्टायम में अलर्ट”

Jitendra Kumar Sinha
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केरल में एक बार फिर बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) का खतरा सामने आया है। अलप्पुझा और कोट्टायम जिलों से भेजे गए सैंपल्स में संक्रमण की पुष्टि हुई है। यह रिपोर्ट भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (NIHSAD) की लैब से आई है। क्रिसमस और नववर्ष के ठीक पहले सामने आए इस प्रकोप ने प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।


बर्ड फ्लू एक वायरल बीमारी है, जिसे एवियन इन्फ्लूएंजा कहा जाता है। यह मुख्य रूप से पक्षियों, खासकर मुर्गियों, बतखों और अन्य पोल्ट्री पक्षियों को प्रभावित करता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में यह वायरस इंसानों में भी फैल सकता है, हालांकि ऐसा बहुत कम होता है। इस बीमारी से पोल्ट्री उद्योग को भारी नुकसान होता है और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी खतरा पैदा हो सकता है।


राज्य सरकार के अनुसार, अलप्पुझा और कोट्टायम जिलों के कुछ इलाकों में मुर्गियों और अन्य पक्षियों की असामान्य मौतों के बाद सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही प्रशासन ने इन क्षेत्रों को संक्रमित क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही आसपास के इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।


संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में अंडे, मांस और सभी पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अतिरिक्त पोल्ट्री फार्मों में पक्षियों की आवाजाही पर रोक, संक्रमित और संदिग्ध पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करना, पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निगरानी, स्थानीय प्रशासन को सख्त दिशा-निर्देश दिया गया है, इन उपायों का उद्देश्य वायरस को अन्य जिलों तक फैलने से रोकना है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। अधपके अंडे या मांस का सेवन नही किया जाए। पोल्ट्री फार्म या मरे हुए पक्षियों के सीधे संपर्क से बचना चाहिए। किसी भी असामान्य बीमारी या पक्षियों की मौत की सूचना प्रशासन को देना चाहिए और हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।


क्रिसमस के मौसम में बर्ड फ्लू का आना पोल्ट्री कारोबार के लिए बड़ा झटका है। अंडे और चिकन की मांग आमतौर पर इस समय बढ़ जाता है, लेकिन प्रतिबंध के कारण किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।


केरल में बर्ड फ्लू का यह नया मामला एक चेतावनी है कि जैविक और पशुजनित बीमारियों को लेकर सतर्क रहना कितना जरूरी है। सरकार और आम जनता की सामूहिक सतर्कता से ही इस संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। समय रहते उठाए गए कदम न केवल पोल्ट्री उद्योग को बचाएंगे, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा।



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