पटना शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं को देखते हुए पटना नगर निगम ने एक अहम कदम उठाने की तैयारी की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नगर निगम ने शहर के सभी 75 वार्डों में “डॉग फीडिंग जोन” बनाने की योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य न केवल आवारा कुत्तों को नियंत्रित करना है, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर आम नागरिकों को होने वाली असुविधा को भी कम करना है।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। अदालत का मानना है कि जानवरों के अधिकारों और आम जनता की सुरक्षा, दोनों के बीच संतुलन आवश्यक है। इसी क्रम में पटना नगर निगम ने यह निर्णय लिया है कि कुत्तों के लिए अलग-अलग निर्धारित फीडिंग जोन बनाए जाएं, ताकि वे सड़कों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भटकने के बजाय तय स्थानों पर ही रहें।
नगर निगम की पीआरओ प्रिया के अनुसार, आवारा कुत्ते आमतौर पर उन्हीं स्थानों पर टिक जाते हैं, जहां उन्हें नियमित रूप से खाना मिलता है। इसी व्यवहार को ध्यान में रखते हुए फीडिंग जोन बनाए जा रहे हैं। इन जोनों में कुत्तों को भोजन देने की व्यवस्था होगी, जिससे वे धीरे-धीरे उन्हीं इलाकों तक सीमित हो जाएंगे। इससे सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर उनका जमावड़ा कम होगा।
नगर निगम मानता है कि शुरुआती चरण में सभी कुत्तों को निर्धारित फीडिंग जोन तक सीमित करना आसान नहीं होगा। कई कुत्ते वर्षों से सड़कों और बाजारों में रह रहे हैं। लेकिन प्रशासन का भरोसा है कि समय के साथ यह व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी। नियमित भोजन, निगरानी और जन-जागरूकता के माध्यम से इस सिस्टम को और बेहतर बनाया जाएगा।
इस योजना को लागू करने के लिए नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड में उपयुक्त जमीन की तलाश शुरू कर दी है। कोशिश यह है कि फीडिंग जोन ऐसे स्थानों पर हों, जहां आम लोगों की आवाजाही कम हो, लेकिन पशु प्रेमियों और नगर निगम की टीम के लिए पहुंच आसान रहे। भविष्य में इन जोनों से आवारा कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी जैसे कार्यक्रमों को भी जोड़ा जा सकता है।
“डॉग फीडिंग जोन” बनने से सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और बाजारों में कुत्तों की मौजूदगी कम होगी। इससे काटने की घटनाओं, ट्रैफिक में रुकावट और डर की भावना में भी कमी आएगी। साथ ही, कुत्तों को भी सुरक्षित और नियमित भोजन मिल सकेगा।
पटना नगर निगम की यह पहल एक संतुलित और मानवीय समाधान की दिशा में कदम है। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह न सिर्फ आवारा कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करेगी, बल्कि शहर को अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में भी मददगार साबित होगी।
