दुनिया के विभिन्न हिस्सों में क्रिसमस केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि एक लंबा पर्वकाल होता है, जो धार्मिक आस्था, पारिवारिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक परंपराओं से भरा रहता है। इसी पर्वकाल का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बच्चों के लिए सबसे रोमांचक दिन है “थ्री किंग्स डे”, जिसे ईसाई परंपरा में एपिफेनी (Epiphany) कहा जाता है। यह पर्व हर साल 6 जनवरी को मनाया जाता है और क्रिसमस के बारह दिनों के समापन का प्रतीक है।
“थ्री किंग्स डे” न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह कल्पना, लोककथाओं, उपहारों और बचपन की मासूम उम्मीदों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। विशेष रूप से स्पेन, मैक्सिको और लैटिन अमेरिकी देशों में यह दिन बच्चों के लिए उतना ही नहीं है, बल्कि कई बार उससे भी अधिक खास होता है, जितना कि क्रिसमस।
एपिफेनी ग्रीक शब्द Epiphaneia से आया है, जिसका अर्थ है, प्रकट होना या ईश्वर का स्वयं को प्रकट करना। ईसाई धर्म में यह दिन उस घटना की याद में मनाया जाता है, जब तीन ज्ञानी पुरुषों (मागी या थ्री किंग्स) ने नवजात बालक यीशु को देखा और उसे उपहार अर्पित किया।
बाइबिल के अनुसार, यह ज्ञानी पुरुष एक चमकते हुए तारे का अनुसरण करते हुए बेथलहम पहुँचे थे। यह तारा ईश्वर के अवतरण का संकेत माना जाता है। इस प्रकार एपिफेनी उस क्षण का प्रतीक है, जब यीशु का दिव्य स्वरूप दुनिया के सामने प्रकट हुआ।
ईसाई ग्रंथों में इन तीन व्यक्तियों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है- मेल्कियोर (Melchior), गैस्पर (Gaspar) और बाल्थाजार (Balthazar)। परंपराओं के अनुसार, ये तीनों अलग-अलग क्षेत्रों से आए थे और दुनिया की विविधता का प्रतिनिधित्व करते थे। समय के साथ इन्हें “राजा” कहा जाने लगा, इसलिए इन्हें थ्री किंग्स कहा जाता है। उपहार स्वरूप सोना (Gold)- यीशु के राजा होने का प्रतीक है । लोबान (Frankincense)- उनकी दिव्यता और ईश्वरत्व का संकेत है और गंधरस (Myrrh)- भविष्य के कष्ट और बलिदान की ओर इशारा।
ईसाई परंपरा में क्रिसमस 25 दिसंबर से शुरू होकर 6 जनवरी तक चलता है, जिसे क्रिसमस के बारह दिन कहा जाता है। इन बारह दिनों का समापन एपिफेनी से होता है। इन दिनों को आध्यात्मिक चिंतन, पारिवारिक उत्सव और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है। एपिफेनी इन सबका चरम बिंदु है, जहाँ धार्मिक अर्थ और लोकपरंपराएँ एक-दूसरे से मिलती हैं।
स्पेन में “थ्री किंग्स डे” को Día de los Reyes Magos कहा जाता है। यहाँ यह पर्व बच्चों के लिए क्रिसमस से भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। स्पेन में बच्चे 5 जनवरी की रात को सोने से पहले एक खाली बॉक्स में घास या सूखी पत्तियाँ रखते हैं और उसे अपने बिस्तर के नीचे या दरवाज़े के पास रख देते हैं। यह परंपरा इस विश्वास से जुड़ी है कि थ्री किंग्स अपने ऊँटों के साथ रात में घर-घर आते हैं। घास ऊँटों के भोजन के लिए होती है, ठीक वैसे ही जैसे कुछ देशों में सांता क्लॉज़ के लिए दूध और कुकीज रखी जाती हैं। 6 जनवरी की सुबह बच्चे उठते हैं तो उन्हें बॉक्स की जगह उपहार, मिठाइयाँ और खिलौने मिलते हैं। यह क्षण बच्चों के लिए सपनों के सच होने जैसा होता है।
5 जनवरी की शाम को स्पेन के लगभग हर शहर में भव्य परेड निकाली जाती है, जिसे “काबालगाटा दे रेयेस” कहा जाता है। परेड की विशेषताएँ हैं थ्री किंग्स की सजी-धजी झाँकियाँ, रंगीन परिधान और संगीत, बच्चों पर मिठाइयाँ फेंकी जाती हैं, पूरे शहर में उत्सव का माहौल रहता है। यह परेड बच्चों के लिए किसी परी कथा से कम नहीं होती है।
“थ्री किंग्स डे” पर Roscaón de Reyes या Roscón de Reyes नामक गोल केक बनाया जाता है। इस केक के अंदर एक छोटी-सी मूर्ति और एक सूखी फलियाँ छिपाई जाती हैं। जिसे मूर्ति मिलती है, उसे उस दिन का “राजा” माना जाता है और जिसे फलियाँ मिलती हैं, उसे अगला केक लाने की जिम्मेदारी मिलती है।
मैक्सिको, अर्जेंटीना, प्यूर्टो रिको और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों में भी “थ्री किंग्स डे” बड़े उत्साह से मनाया जाता है। बच्चों की भूमिका होती है- बच्चे थ्री किंग्स को पत्र लिखते हैं। अपने अच्छे व्यवहार का जिक्र करते हैं और उपहारों की इच्छा जताते हैं। मैक्सिको में इस दिन सामुदायिक भोजन और बच्चों के लिए विशेष कार्यक्रम होते हैं। इटली में इसे La Befana से जोड़ा जाता है। ग्रीस में जल आशीर्वाद और समुद्री रस्में से और फ्रांस में Galette des Rois केक की परंपरा है। हर देश ने इस पर्व को अपनी सांस्कृतिक पहचान के अनुसार ढाल लिया है।
बच्चों के लिए “थ्री किंग्स डे” खास होता है। क्योंकि उपहारों का रोमांच, परेड और कहानियाँ, कल्पना और विश्वास की दुनिया और परिवार के साथ समय। यह पर्व बच्चों में साझा करने, धन्यवाद और आस्था के मूल्य भी विकसित करता है। आज के डिजिटल युग में भी “थ्री किंग्स डे” की परंपराएँ जीवित हैं। सोशल मीडिया, स्कूल कार्यक्रम और चर्च समारोहों के माध्यम से इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा है।
“थ्री किंग्स डे” या “एपिफेनी” केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह विश्वास, आशा और बचपन की कल्पनाओं का उत्सव है। यह याद दिलाता है कि सच्चा आनंद उपहारों से अधिक, देने और साझा करने की भावना में छिपा होता है। बच्चों की चमकती आँखें, परेड की रंगीन रौनक और सदियों पुरानी कहानियाँ, यही थ्री किंग्स डे की असली पहचान है।
