पचास बरस बाद भी जिंदा है फिल्म ‘प्रतिज्ञा’

Jitendra Kumar Sinha
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हिन्दी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो समय के साथ सिर्फ पुरानी नहीं होती, बल्कि स्मृतियों का हिस्सा बन जाता है। 1975 में रिलीज हुई फिल्म ‘प्रतिज्ञा’ ऐसी ही एक यादगार कृति है, जिसे आज 50 साल पूरे हो चुके हैं। धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, अजित, जॉनी वॉकर और कैस्टो मुखर्जी जैसे सितारों से सजी यह फिल्म उस दौर में दर्शकों की नब्ज पर हाथ रखती थी, जब सिनेमा मनोरंजन के साथ-साथ संवाद और गीतों के जरिए जनमानस में अपनी जगह बनाता था।


1975 भारतीय सिनेमा के लिए ऐतिहासिक साल माना जाता है। इसी वर्ष ‘शोले’ जैसी कालजयी फिल्म आई, जिसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उसी साल ‘प्रतिज्ञा’ कमाई के मामले में ‘शोले’ के बाद दूसरे स्थान पर रही। यह अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि दर्शकों ने इस एक्शन-कॉमेडी को कितना पसंद किया।


फिल्म का निर्देशन किया था दुलाल गुहा ने, जो व्यावसायिक सिनेमा की नब्ज पहचानने के लिए जाने जाते थे। ‘प्रतिज्ञा’ की कहानी प्रतिशोध, प्रेम और हास्य के इर्द-गिर्द घूमता है। धर्मेंद्र का किरदार पूरी फिल्म की आत्मा है, देसी अंदाज, दमदार संवाद और एक्शन से भरपूर। वहीं हेमा मालिनी ने अपने चिर-परिचित आकर्षण और सशक्त अभिनय से कहानी को संतुलन दिया।


फिल्म के खलनायक के रूप में अजित ने एक बार फिर साबित किया कि वह नकारात्मक भूमिकाओं में कितने प्रभावशाली हो सकते हैं। उनकी ठंडी आवाज और अलग अंदाज फिल्म को यादगार बनाता है। कॉमेडी का तड़का लगाया जॉनी वॉकर ने, जिनके दृश्य आज भी दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आते हैं। सहायक कलाकारों ने भी कहानी को मजबूती दी, जिससे फिल्म कहीं बोझिल नहीं लगती।


लेकिन अगर ‘प्रतिज्ञा’ की बात हो और “मैं जट यमला पगला दीवाना…” का जिक्र न आए, तो बात अधूरी रह जाती है। यह गाना सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है। शादी-ब्याह से लेकर आज के रील्स और डीजे ट्रैक्स तक, यह गीत आज भी उतना ही लोकप्रिय है जितना 1975 में था। धर्मेंद्र के देसी अंदाज और मस्ती भरे डांस ने इस गाने को अमर बना दिया।


50 साल बाद भी ‘प्रतिज्ञा’ इसलिए याद की जाती है क्योंकि यह फिल्म उस दौर की सादगी, मनोरंजन और स्टार पावर का बेहतरीन उदाहरण है। यह याद दिलाती है कि बिना भारी तकनीक और बड़े बजट के भी एक फिल्म दर्शकों के दिलों पर राज कर सकती है। ‘प्रतिज्ञा’ आज भी यही प्रतिज्ञा निभा रही है। 



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