“स्टेपेलिया गिगैंटिया” (Stapelia gigantea) दक्षिण अफ्रीका का एक बेहद अनोखा और आकर्षक रसीला पौधा है। इसे आम बोलचाल में कैरियन फ्लावर या मुर्दा फूल कहा जाता है। वजह है इसके फूलों से आने वाली सड़े हुए मांस जैसी तीखी दुर्गंध। देखने में यह फूल जितना सुंदर और मखमली लगता है, उसकी गंध उतनी ही चौंकाने वाली होती है। प्रकृति ने इसे ऐसा बनाया है कि यह दुर्गंध मक्खियों और मांसाहारी कीड़ों को आकर्षित कर परागण करवा सके।
“स्टेपेलिया गिगैंटिया” के फूल तारे के आकार का होता है और इसका आकार 25 से 40 सेंटीमीटर तक हो सकता है। यह इसे दुनिया के सबसे बड़े फूलों में शामिल करता है। फूल की सतह मखमली होती है, जिस पर लाल, पीले और भूरे रंग की धारियां और बालनुमा संरचनाएं दिखती हैं। दूर से यह फूल बेहद सुंदर लगता है, लेकिन पास जाते ही इसकी गंध नाक पर हाथ रखने को मजबूर कर देती है।
इस पौधे की सबसे खास बात इसकी दुर्गंध है। यह गंध सड़े हुए मांस या लाश जैसी होती है, जिसे कैरियन स्मेल कहा जाता है। यही गंध मक्खियों और मांस खाने वाले कीड़ों को भ्रमित करती है। वे इसे सड़ा मांस समझकर फूल पर बैठते हैं और इसी प्रक्रिया में परागण हो जाता है। यह प्रकृति की एक अद्भुत रणनीति है, जहां सुंदरता और दुर्गंध मिलकर जीवन चक्र को आगे बढ़ाता है।
“स्टेपेलिया गिगैंटिया” एक रसीला पौधा है, इसलिए इसे बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है। यह पूरी धूप या तेज रोशनी में अच्छी तरह बढ़ता है। कम धूप में यह कमजोर पड़ सकता है और फूल नहीं देता है। इसलिए मिट्टी पूरी तरह सूखने के बाद ही पानी देना चाहिए। रोज कम से कम 5–6 घंटे की धूप जरूरी है। फूल आने के समय इसे घर के अंदर रखने से बचना चाहिए। बल्कि बालकनी, छत या खुले और हवादार स्थान पर इसे रखना चाहिए।
भारत में अब कई पौधों के शौकीन इसे अपनी बालकनी या टैरेस गार्डन में उगा रहे हैं। हालांकि, फूल आने के 2-3 दिनों तक इसकी दुर्गंध के कारण लोग इससे थोड़ी दूरी बनाए रखते हैं। फूल केवल कुछ ही दिन खिलता है, लेकिन यह कम समय में गहरी छाप छोड़ जाता है।
