केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को हटाकर एक नया कानून लाने की तैयारी शुरू कर दी है जिसका नाम है VB-G RAM G, यानी Viksit Bharat Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin). इस नए कानून को संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक के रूप में पेश किये जाने की संभावना जताई जा रही है और यह पुराने अधिनियम की जगह लेगा.
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि नए कानून में रोजगार की गारंटी की अवधि बढ़ायी जाएगी। MGNREGA के तहत ग्रामीण परिवारों को हर साल कम से कम 100 दिन का रोजगार मिलना तय था, जबकि VB-G RAM G में यह गारंटी 125 दिनों तक बढ़ाने की योजना है, जिससे ग्रामीण परिवारों को ज्यादा आय का अवसर मिलेगा. पुराने कानून में रोजगार की गारंटी कितनी मजबूती से लागू हो पाती थी, यह अलग सवाल था, लेकिन नया बिल इसका दायरा बढ़ाने का दावे के साथ लाया जा रहा है.
इस नए कानून में मजदूरों के भुगतान (वेज़ पेमेंट) का तरीका भी बदलने का प्रावधान है। वर्तमान में मनरेगा में मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर होना तय है, लेकिन अक्सर भुगतान में देरी होती रही है. नए कानून में इसे साप्ताहिक आधार पर भुगतान की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है जिससे मजदूरों को तेजी से पैसा मिल सके. भुगतान में किसी भी देरी की स्थिति में मुआवजा देने का नियम भी बनाए रखने की बात कही जा रही है.
सबसे बड़ा प्रशासनिक बदलाव यह है कि अब राज्य सरकारों को भी फंड का हिस्सा शेयर करना पड़ेगा। मनरेगा के तहत केंद्र सरकार अकेले ही मजदूरों को भुगतान का पूरा खर्च उठाती थी, लेकिन VB-G RAM G के तहत राज्य सरकारों को भी खर्च में हिस्सेदारी करनी होगी. कुछ राज्यों के लिए यह अनुपात अलग-अलगा रखा जा रहा है, जैसे कि पूर्वोत्तर और पर्वतीय राज्यों के लिए केंद्र-राज्य साझेदारी 90:10 तक, जबकि बाकी राज्यों के लिए 60:40 तक का अनुपात सुझाया गया है. यदि कोई राज्य तय सीमा से अधिक खर्च करता है तो अतिरिक्त खर्च राज्य को ही वहन करना होगा.
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव खेती के मौसम में रोजगार कार्य पर ब्रेक की व्यवस्था है, जिसका अर्थ है कि बुवाई और कटाई जैसे पीक कृषि सीजन में ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम को अस्थायी रूप से रोक दिया जाएगा ताकि खेतों में काम प्रभावित न हो. सरकार हर वित्तीय वर्ष में लगभग 60 दिनों तक ऐसी ब्रेक अवधि घोषित कर सकती है, जिसे अलग-अलग जिलों या पंचायतों के स्तर पर लागू किया जा सकता है.
इन बदलावों के अलावा सरकार का दावा है कि नया VB-G RAM G कानून ग्रामीण लोगों के आजिविका और स्थायी रोजगार के अवसरों को और बढ़ायेगा, जिसमें केवल मजदूरी पर निर्भरता कम होगी और आजीविका के वैकल्पिक साधन जैसे कृषि से जुड़े अन्य काम या कौशल विकास को भी शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है.
राजनीतिक मोर्चे पर इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर बहस और विरोध भी तेज हुआ है। विपक्षी दलों का कहना है कि मनरेगा को खत्म करना ग्रामीण कार्यकर्ताओं और मजदूरों के लिए एक बड़ी सुरक्षा घटाने जैसा कदम है और इसे लेकर संसद में विरोध और सवाल उठाये जा रहे हैं, खासकर मनरेगा से “महात्मा गांधी” का नाम हटाने पर कड़ी प्रतिक्रिया मिल रही है.
सरल शब्दों में कहें तो VB-G RAM G बिल MGNREGA को बदलते हुए ग्रामीण रोजगार की गारंटी को विस्तारित, भुगतान प्रणाली को सुधरते हुए, वित्तीय साझेदारी में राज्यों को शामिल करते हुए और खेती के मौसम में रोजगार के कार्य को व्यवस्थित करते हुए एक नया ढांचा पेश करने की कोशिश कर रहा है। इस बदलाव को सरकार एक बड़े ग्रामीण रोजगार सुधार के रूप में पेश कर रही है, लेकिन इसके प्रभाव और आलोचना को लेकर भारी बहस जारी है.
