बिहार को फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ स्वास्थ्य विभाग 10 फरवरी से सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) राउंड की शुरुआत करने जा रहा है। यह अभियान राज्य की 396 यूनिट्स में संचालित होगा। इसके तहत 19 जिलों में डबल ड्रग और 15 जिलों में ट्रिपल ड्रग थेरेपी दी जाएगी। यह पहल न केवल एक सरकारी कार्यक्रम है, बल्कि इसे एक व्यापक जन-आंदोलन के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हाल में कराए गए नाइट ब्लड सर्वे के नतीजे उत्साहजनक रहे हैं। सर्वे के अनुसार, राज्य की 108 यूनिट्स में फाइलेरिया संक्रमण की दर एक प्रतिशत से नीचे आ चुकी है। इन्हें अब ‘प्री-टास’ श्रेणी में शामिल किया गया है। यह उपलब्धि दर्शाता है कि पिछले वर्षों में किए गए प्रयास रंग ला रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत है कि यदि यही गति बनी रही तो बिहार जल्द ही फाइलेरिया मुक्त राज्य बनने की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ा सकता है।
इस अभियान के तहत विभिन्न जिलों में अलग-अलग रणनीति अपनाई जा रही है। जहां संक्रमण का स्तर अपेक्षाकृत अधिक है, वहां ट्रिपल ड्रग थेरेपी दी जाएगी, जबकि अन्य जिलों में डबल ड्रग थेरेपी से काम लिया जाएगा। इसका उद्देश्य रोग के प्रसार की कड़ी को पूरी तरह तोड़ना है। नियमित और सही तरीके से दवा सेवन करने से मच्छरों के जरिए फैलने वाले इस रोग पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
फाइलेरिया राज्य सलाहकार डॉ. अनुज सिंह रावत के अनुसार, इस बार अभियान को केवल प्रशासनिक पहल तक सीमित नहीं रखा गया है। पहली बार सीएचओ-लीड रोगी हितधारक मंच के माध्यम से इसे सामुदायिक आंदोलन का रूप दिया गया है। इसका अर्थ है कि स्वास्थ्यकर्मी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर इस लड़ाई में भागीदार बनेंगे। लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे दवा अवश्य लें और अपने परिवार तथा पड़ोसियों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
फाइलेरिया एक ऐसा रोग है, जो धीरे-धीरे शरीर को विकृत कर देता है और जीवनभर की पीड़ा का कारण बन सकता है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी उपाय सामूहिक दवा सेवन है। यदि एक भी व्यक्ति दवा नहीं लेता, तो संक्रमण की श्रृंखला बनी रह सकती है। इसलिए जनभागीदारी इस अभियान की रीढ़ है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी बस्तियों तक स्वास्थ्यकर्मी घर-घर पहुंचकर दवा खिलाएंगे और लोगों को इसके महत्व के बारे में समझाएंगे।
यह महाभियान बिहार के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। नाइट ब्लड सर्वे का सकारात्मक परिणाम बताता है कि राज्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब आवश्यकता है कि प्रत्येक नागरिक इस पहल का हिस्सा बने। यदि समाज और सरकार मिलकर इस अभियान को सफल बनाते हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब बिहार फाइलेरिया मुक्त राज्य के रूप में देश के सामने एक मिसाल पेश करेगा। यह न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र की जीत होगी, बल्कि एक स्वस्थ और सशक्त बिहार की नींव भी रखेगी।
