सिनेमा के पर्दे पर देशभक्ति की रहेगी गूंज - “युद्ध और राष्ट्रवाद पर बनी है फिल्में”

Jitendra Kumar Sinha
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भारतीय सिनेमा में युद्ध और राष्ट्रवाद हमेशा से एक सशक्त और भावनात्मक विषय रहा है। जब भी देश की सीमाओं, सैनिकों के बलिदान और राष्ट्रीय स्वाभिमान की बात होती है, तो सिनेमा दर्शकों के दिलों में सीधे उतर जाता है। वर्ष 2026 के जनवरी महीने में भी ऐसी ही फिल्मों की झड़ी लगने वाली है, जो न केवल मनोरंजन करेगी बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना को और प्रखर करेगी।

जनवरी की सबसे बड़ी चर्चा 1971 के भारत-पाक युद्ध पर आधारित दो फिल्मों को लेकर है। 23 जनवरी को रिलीज होने जा रही है ‘बॉर्डर-2’, जो 1997 में आई सुपरहिट फिल्म ‘बॉर्डर’ का सीक्वल है। जे.पी. दत्ता की ‘बॉर्डर’ आज भी देशभक्ति फिल्मों की मिसाल मानी जाती है। उसके संवाद, गीत और युद्ध दृश्य आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। ‘बॉर्डर-2’ से दर्शकों को उसी तरह के जज्बे, शौर्य और बलिदान की उम्मीद है। यह फिल्म 1971 के युद्ध की पृष्ठभूमि में सैनिकों की रणनीति, साहस और मानवीय पक्ष को नए तकनीकी स्तर पर दिखाने का प्रयास करेगी।

इसके ठीक अगले दिन, 24 जनवरी को रिलीज होगी फिल्म ‘इक्कीस’, जो भारतीय सैनिकों के शौर्य और बलिदान पर आधारित है। इस फिल्म की एक खास बात यह है कि इसमें दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र आखिरी बार बड़े पर्दे पर नजर आएंगे। धर्मेंद्र ने अपने लंबे फिल्मी करियर में देशभक्ति से लेकर पारिवारिक और सामाजिक फिल्मों तक हर तरह की भूमिका निभाई हैं। ‘इक्कीस’ उनके अभिनय को एक सम्मानजनक विदाई देने वाली फिल्म मानी जा रही है। यह फिल्म न केवल युद्ध के मैदान की कहानी कहेगी, बल्कि सैनिकों और उनके परिवारों के त्याग को भी भावनात्मक रूप से प्रस्तुत करेगी।

इसी कड़ी में 14 जनवरी को रिलीज हो रही है तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’। यह फिल्म सीधे तौर पर युद्ध पर आधारित न होकर राष्ट्रवाद और जननायक की छवि को सामने लाती है। खास बात यह है कि ‘जन नायकन’ विजय की आखिरी फिल्म है, क्योंकि उन्होंने फिल्मों को अलविदा कहकर सक्रिय राजनीति में कदम रख लिया है। ऐसे में यह फिल्म उनके प्रशंसकों के लिए भावनात्मक महत्व भी रखती है। विजय की छवि पहले से ही जनप्रिय और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी रही है, इसलिए इस फिल्म में भी राष्ट्र, समाज और जनता के सवालों को प्रमुखता से दिखाए जाने की उम्मीद है।

जनवरी का महीना भारतीय सिनेमा में युद्ध और राष्ट्रवाद की भावना को एक बार फिर केंद्र में लाने जा रहा है। ये फिल्में सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास, बलिदान और देशप्रेम का महत्व समझाने का माध्यम भी बनेगी। सिनेमा जब राष्ट्र के प्रति सम्मान और गर्व की भावना जगाता है, तो उसका असर लंबे समय तक समाज पर बना रहता है।

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