राज्य में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने एक अहम निर्णय लिया है। अब राज्य के सभी स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने वाली गाड़ियों का रंग एक समान होगा। परिवहन विभाग ने निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि सभी स्कूली वाहन “सुनहरे पीले रंग” में ही चलेंगे। इस कदम का उद्देश्य न केवल वाहनों की पहचान को आसान बनाना है, बल्कि सड़क सुरक्षा को भी मजबूत करना है।
परिवहन विभाग के निर्देशानुसार, स्कूलों से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी गाड़ियां जैसे बस, वैन, ऑटो और अन्य वाहन, सुनहरे पीले रंग में होगी। इसके अलावा, वाहन की बॉडी के बीचोंबीच पीले रंग का बॉर्डर होगा, जिस पर स्कूल का नाम बड़े और स्पष्ट अक्षरों में लिखा जाएगा। इससे आम लोगों, ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन को तुरंत यह पहचानने में मदद मिलेगी कि वाहन स्कूली बच्चों को ले जा रहा है।
विभाग ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इन निर्देशों का पालन नहीं करने वाले वाहन चालकों और स्कूल संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मार्च महीने से स्कूली वाहनों की जांच अभियान को और सख्त किया जाएगा। बिना निर्धारित रंग, स्पष्ट स्कूल नाम या आवश्यक मानकों के पाए जाने वाले वाहनों पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है।
बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए, राज्यभर के स्कूली वाहनों से जुड़े ड्राइवरों को हर तीन महीने में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में विशेष रूप से स्पीड ड्राइविंग, ओवर स्पीड, यातायात नियमों और बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर जोर दिया जाएगा। प्रशिक्षित ड्राइवर न केवल दुर्घटनाओं की संभावना को कम करेगा, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ाएगा।
यह फैसला बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ अभिभावकों के लिए भी राहत भरा है। एकरूप रंग और स्पष्ट पहचान से सड़क पर अन्य वाहन चालक भी सतर्क रहेंगे। साथ ही, नियमित प्रशिक्षण से ड्राइवरों की जिम्मेदारी और पेशेवर व्यवहार में सुधार आएगा।
“सुनहरे पीले रंग” में स्कूली वाहनों को अनिवार्य करना राज्य सरकार और परिवहन विभाग की एक दूरदर्शी पहल है। यह कदम न सिर्फ नियमों में एकरूपता लाएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा, अनुशासन और बच्चों की सुरक्षित आवाजाही को भी सुनिश्चित करेगा। यदि इस निर्णय का सख्ती से पालन किया गया, तो यह राज्य के लिए एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल बन सकता है।
