विराट रामायण मंदिर में 17 जनवरी को होगी विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग की स्थापना

Jitendra Kumar Sinha
0





बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित केसरिया के निकट कैथवलिया में विकसित हो रहा “विराट रामायण मंदिर” एक बार फिर आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक गौरव का केंद्र बनने जा रहा है। 17 जनवरी को यहां विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना प्रस्तावित है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के लिहाज से भी ऐतिहासिक माना जा रहा है।


विराट रामायण मंदिर, पद्मश्री से सम्मानित आचार्य किशोर कुणाल का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है। महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा 120 एकड़ भूमि में विकसित किया जा रहा इस भव्य परिसर में 18 शिखर, 22 मंदिर और लगभग 270 फुट ऊंचा मुख्य शिखर प्रस्तावित है। इस विशाल धार्मिक परियोजना का उद्देश्य भारत की रामायण परंपरा और सनातन संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाना है।


मंदिर में स्थापित होने वाला यह शिवलिंग अपने आप में अद्वितीय है। तमिलनाडु के महाबलीपुरम क्षेत्र के पट्टीकाडु गांव में लगभग 10 वर्षों की अथक मेहनत के बाद तैयार किया गया यह 33 फुट ऊंचा और 210 टन वजनी “सहस्त्रलिंगम” है। यह एक ही ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से निर्मित है, जो इसे विश्व में अपनी तरह का सबसे बड़ा शिवलिंग बनाता है।


21 नवंबर को महाबलीपुरम से 96 चक्कों वाले विशेष ट्रेलर पर यह शिवलिंग रवाना हुआ। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए करीब 2500 किलोमीटर की दूरी तय कर यह बिहार पहुंचा। गोपालगंज जिला के बलथरी और चैनपट्टी में इसके सम्मान में भव्य स्वागत द्वार बनाया गया, पूजा-अर्चना, आरती और बैंड-बाजे की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे यह यात्रा स्वयं एक धार्मिक उत्सव में बदल गई।


शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए देश के पांच पवित्र स्थलों हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलाश-मानसरोवर और सोनपुर, से पावन जल मंगाया गया है। स्थापना समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, पीठ पूजा, हवन और विशेष अनुष्ठान होंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण अत्यंत पुण्यकारी माना जा रहा है।


महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार, 17 जनवरी को शिवलिंग की विधिवत स्थापना की जाएगी। इस अवसर को और भव्य बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की भी योजना है। देश-विदेश से संत, धर्माचार्य और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।


“विराट रामायण मंदिर” में शिवलिंग की स्थापना बिहार ही नहीं, पूरे भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। यह आयोजन आस्था, परिश्रम और सनातन परंपरा के समन्वय का जीवंत उदाहरण बनेगा।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top