सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बैरियर-मुक्त टोलिंग व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नए नियमों के तहत अब किसी भी वाहन का फिटनेस प्रमाणपत्र प्राप्त करने या वाहन हस्तांतरण (बिक्री) के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) हासिल करने से पहले सभी लंबित टोल टैक्स का भुगतान करना अनिवार्य होगा। यदि किसी वाहन पर राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई ‘अपूर्ण उपयोग शुल्क’ बकाया है, तो परिवहन विभाग उससे जुड़े अहम दस्तावेज जारी नहीं करेगा।
अब तक कई मामलों में वाहन मालिक टोल भुगतान से बच निकलते थे, खासकर नई तकनीक आधारित टोलिंग में। लेकिन नए नियमों के बाद यह संभव नहीं रहेगा। वाहन बेचते समय फॉर्म 28 में लंबित टोल देनदारियों का विवरण देना होगा। यह विवरण डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सत्यापित किया जाएगा। यानि वाहन का ट्रांसफर, रजिस्ट्रेशन अपडेट या फिटनेस सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाएं तभी पूरी होगी जब सभी टोल बकाया चुका दिए जाएंगे।
सरकार मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) प्रणाली को देशभर में लागू कर रही है। इस प्रणाली में टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होती है, बल्कि कैमरा और सेंसर के जरिए वाहन की पहचान कर स्वतः शुल्क काट लिया जाता है। हालांकि, तकनीकी खामियों या जानबूझकर की गई टोल चोरी के कारण राजस्व का नुकसान होता रहा है। नए नियमों का उद्देश्य इसी टोल चोरी पर लगाम लगाना और इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह को अधिक प्रभावी बनाना है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इस तकनीक-आधारित व्यवस्था से टोल वसूली की लागत में बड़ा बदलाव आएगा। अभी जहां टोल संग्रह की लागत लगभग 15 प्रतिशत है, वह घटकर मात्र तीन प्रतिशत रह जाएगी। इससे न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। डिजिटल सत्यापन से यह साफ हो जाएगा कि किस वाहन पर कितना टोल बकाया है।
नई व्यवस्था से ईमानदार वाहन मालिकों को लाभ होगा, क्योंकि टोल सिस्टम अधिक व्यवस्थित और निष्पक्ष बनेगा। राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और विस्तार के लिए आवश्यक धन भी समय पर उपलब्ध होगा। हालांकि, शुरुआती दौर में तकनीकी दिक्कतें, डेटा अपडेट में देरी और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों या कम डिजिटल साक्षरता वाले लोगों के लिए यह प्रक्रिया थोड़ी जटिल लग सकती है।
केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 2026 के तहत टोल बकाया को दस्तावेजी प्रक्रियाओं से जोड़ना एक बड़ा नीतिगत कदम है। इससे टोल चोरी पर अंकुश लगेगा, राजस्व बढ़ेगा और एमएलएफएफ प्रणाली को मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में यह व्यवस्था सड़क परिवहन को अधिक पारदर्शी, तकनीक-आधारित और अनुशासित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
