ओटीटी प्लेटफॉर्म पर क्राइम थ्रिलर की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ‘दलदल’ एक ऐसी वेब सीरीज है, जो दर्शकों को सिर्फ अपराध की कहानी नहीं सुनाती है, बल्कि उन्हें अपराध की मानसिक, सामाजिक और नैतिक परतों में भी उतारती है। विश्व धामिजा के चर्चित उपन्यास ‘भिंडी बाजार’ पर आधारित यह सीरीज़ मुंबई की अंधेरी गलियों में पनपते अपराध और उसे रोकने की कोशिश में उलझी पुलिस व्यवस्था की जटिलताओं को सामने रखती है।
‘दलदल’ की कहानी एक सीरियल किलर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मुंबई में दहशत का पर्याय बन चुका है। हत्याएं सिर्फ अपराध नहीं है, बल्कि एक संदेश की तरह सामने आती हैं। इस केस की जिम्मेदारी संभालती हैं डीसीपी रीता फरेरा, जो न सिर्फ एक तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि अपने अतीत के संघर्षों से भी जूझ रही हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, मामला केवल एक अपराध तक सीमित नहीं रहता है, बल्कि सिस्टम, सत्ता, लालच और इंसानी कमजोरियों का दलदल बन जाता है। प्रश्न यही है कि क्या रीता कातिल तक पहुंच पाएंगी या खुद इस दलदल में फंस जाएंगी?
इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है इसके कलाकार। भूमि पेडनेकर डीसीपी रीता फरेरा के किरदार में पूरी तरह ढल जाती हैं। उनका संयमित, गंभीर और आंतरिक द्वंद्व से भरा अभिनय किरदार को विश्वसनीय बनाता है। यह उनके करियर का एक अलग और साहसी चयन है। समारा तिजोरी और आदित्य रावल सहायक भूमिकाओं में कहानी को मजबूती देते हैं। उनके किरदार कथानक को आगे बढ़ाने के साथ-साथ कई चौंकाने वाले मोड़ भी लाते हैं।
निर्देशक अमृत राज गुप्ता ने सीरीज को तेज रफ्तार थ्रिलर बनाने के बजाय धीमी, परतदार और मनोवैज्ञानिक शैली में पेश किया है। मुंबई की गलियों, पुलिस थानों और अपराध स्थलों का चित्रण बेहद यथार्थवादी है। सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर तनाव को लगातार बनाए रखते हैं, जिससे दर्शक अंत तक कहानी से जुड़े रहते हैं।
‘दलदल’ सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि अपराध कैसे सामाजिक असमानता, सत्ता के दुरुपयोग और व्यक्तिगत कुंठाओं से जन्म लेता है। यह सीरीज सवाल उठाती है कि अपराधी कौन है, वह जो हत्या करता है या वह व्यवस्था जो उसे वहां तक पहुंचने देती है?
‘दलदल’ एक सशक्त, गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाली क्राइम थ्रिलर सीरीज है। दमदार अभिनय, मजबूत कहानी और यथार्थवादी निर्देशन इसे भीड़ से अलग बनाता है।
