लक्षद्वीप में चींटी से भी छोटे झींगे की खोज - ‘गैलेथिया बालासुब्रमण्यनी’

Jitendra Kumar Sinha
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हिंद महासागर की गोद में बसे लक्षद्वीप के स्वच्छ जल और रंग-बिरंगे कोरल रीफ लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। अब इसी समुद्री स्वर्ग से एक बेहद रोचक खोज सामने आई है। वैज्ञानिकों ने अगत्ती द्वीप के पास चींटी से भी छोटे, मात्र 3 मिलीमीटर लंबे झींगे की एक नई प्रजाति की पहचान की है। इस नई प्रजाति का नाम प्रसिद्ध वैज्ञानिक के सम्मान में ‘गैलेथिया बालासुब्रमण्यनी’ रखा गया है। आकार में भले ही यह बेहद छोटा हो, लेकिन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।


यह खोज समुद्री जैव विविधता पर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा की गई। अगत्ती द्वीप के आसपास के कोरल रीफ क्षेत्र में सूक्ष्म जीवों की जांच के दौरान शोधकर्ताओं को यह अनोखा झींगा मिला।


शुरुआत में इसकी अत्यंत छोटी काया के कारण इसे सामान्य समुद्री जीव समझा गया, लेकिन माइक्रोस्कोपिक परीक्षण और डीएनए विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि यह झींगे की एक नई और अब तक अज्ञात प्रजाति है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसकी शारीरिक संरचना, रंगत और सूक्ष्म अंगों की बनावट इसे अन्य ज्ञात प्रजातियों से अलग बनाती है।


नई प्रजाति का नाम ‘गैलेथिया बालासुब्रमण्यनी’ प्रसिद्ध समुद्री वैज्ञानिक बालासुब्रमण्यन के सम्मान में रखा गया है। समुद्री जीवविज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए यह नामकरण किया गया है। विज्ञान में नई प्रजातियों का नामकरण अक्सर उन वैज्ञानिकों के सम्मान में किया जाता है जिन्होंने उस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हो। इससे न केवल उनके योगदान को मान्यता मिलती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा मिलती है।


यह झींगा मात्र 3 मिलीमीटर लंबा है यानि एक साधारण चींटी से भी छोटा। लेकिन इसकी पारिस्थितिक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह झींगा समुद्र में मौजूद जैविक कचरे और मृत जीवों के अवशेषों को खाकर समुद्री पर्यावरण को साफ रखने में मदद करता है। कोरल रीफ समुद्री जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह झींगा रीफ के आसपास जमा गंदगी को साफ करता है, जिससे कोरल स्वस्थ रहता है। यह छोटी मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के लिए भोजन का स्रोत है, जिससे समुद्री खाद्य श्रृंखला संतुलित रहती है।


लक्षद्वीप के कोरल रीफ दुनिया के सबसे समृद्ध और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों में गिना जाता है। ये रीफ हजारों समुद्री जीवों का घर हैं। लेकिन जलवायु परिवर्तन, समुद्री प्रदूषण और बढ़ते तापमान के कारण कोरल रीफ पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में ‘गैलेथिया बालासुब्रमण्यनी’ जैसे सूक्ष्म जीवों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ये जीव समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सफाई और संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।


नई प्रजाति की खोज कई कारणों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह दर्शाती है कि समुद्र की गहराइयों में अभी भी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है। सूक्ष्म जीवों की विविधता का अध्ययन जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में मदद कर सकता है। यह खोज समुद्री संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में प्रेरित करती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की खोजें हमें समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की जटिलता और उसकी नाजुकता दोनों का एहसास कराती हैं।


लक्षद्वीप जैसे द्वीप समूहों की समुद्री जैव विविधता अत्यंत संवेदनशील है। बढ़ते पर्यटन, प्लास्टिक प्रदूषण और वैश्विक तापमान वृद्धि से इन क्षेत्रों को खतरा है। यदि इन सूक्ष्म जीवों का आवास नष्ट होता है, तो इसका प्रभाव पूरी खाद्य श्रृंखला और समुद्री संतुलन पर पड़ सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों ने स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण संरक्षण एजेंसियों से अपील की है कि कोरल रीफ क्षेत्रों की विशेष सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


‘गैलेथिया बालासुब्रमण्यनी’ की खोज केवल एक नई प्रजाति का पता लगाना नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि समुद्री विज्ञान के क्षेत्र में अभी अनेक रहस्य छिपे हुए हैं। आने वाले समय में इस झींगे के व्यवहार, प्रजनन प्रणाली और पारिस्थितिक योगदान पर और विस्तृत अध्ययन किए जाएंगे। संभव है कि इससे समुद्री पारिस्थितिकी और संरक्षण के नए आयाम सामने आएं।


लक्षद्वीप में मिली यह चींटी से भी छोटी झींगे की नई प्रजाति आकार में भले ही सूक्ष्म हो, लेकिन समुद्री जीवन में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ‘गैलेथिया बालासुब्रमण्यनी’ न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि का प्रतीक है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि प्रकृति का हर छोटा जीव पारिस्थितिकी तंत्र की बड़ी तस्वीर का अहम हिस्सा होता है।



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