आस्था, अनुशासन और सुगम दर्शन के लिए बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में मोबाइल पर लगा प्रतिबंध

Jitendra Kumar Sinha
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 https://upload.wikimedia.org/wikipedia/commons/5/56/Kedarnath_Temple_in_Rainy_season.jpg


उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इन पवित्र धामों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसी क्रम में आगामी चारधाम यात्रा को अधिक सुव्यवस्थित, श्रद्धामय और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से एक अहम निर्णय लिया गया है। अब “बद्रीनाथ धाम” और “केदारनाथ धाम” के मंदिर परिसर से 70 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।


इस निर्णय के तहत श्रद्धालु मंदिर के अत्यंत समीप मोबाइल फोन का उपयोग नहीं कर सकेंगे। विशेष रूप से रील, वीडियो या फोटो शूट करने पर रोक होगी। प्रशासन और मंदिर समिति का मानना है कि इससे मंदिर की पवित्रता बनी रहेगी और दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम होगी। आज के डिजिटल युग में जहां हर क्षण कैमरे में कैद करने की प्रवृत्ति बढ़ी है, वहां यह कदम श्रद्धालुओं को आत्मिक अनुभूति से जोड़ने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं। लोग रील और वीडियो बनाने के लिए रुक जाते थे, जिससे दर्शन पंक्ति बाधित होती थी। भीड़ में ध्यान मोबाइल पर होने से धक्का-मुक्की और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती थी। मंदिर परिसर में शोर, फ्लैश और अनावश्यक गतिविधियों से पवित्रता प्रभावित होती थी। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लगाया गया है।


इस निर्णय को लागू करने में जिला प्रशासन और बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति मिलकर कार्य करेंगे। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि मंदिर समिति प्रशासन के साथ समन्वय कर धामों में व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाएगी। उनका कहना है कि यह प्रतिबंध किसी को असुविधा पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को सहज और शांतिपूर्ण दर्शन का अनुभव देने के लिए है।


यह निर्णय श्रद्धालुओं के अनुभव को एक नई दिशा देगा। मोबाइल से दूरी बनाकर श्रद्धालु अधिक एकाग्रता के साथ पूजा-अर्चना कर सकेंगे। दर्शन के समय ध्यान भटकने के बजाय मन आध्यात्मिक अनुभूति में लीन रहेगा। मंदिर परिसर में अनुशासन और शांति बनी रहेगी। बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को भी भीड़ में आसानी होगी।


कई धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम “डिजिटल डिटॉक्स” की तरह काम करेगा, जिससे तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य साकार होगा।


हालांकि कुछ लोग इसे आधुनिक जीवनशैली पर अंकुश के रूप में देख सकते हैं, लेकिन आस्था के दृष्टिकोण से यह निर्णय संतुलित प्रतीत होता है। प्रशासन ने मोबाइल पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि केवल मंदिर के 70 मीटर के दायरे तक सीमित किया है। बाहर श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार मोबाइल का उपयोग कर सकते हैं। इस तरह आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया गया है।


बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में 70 मीटर के दायरे में मोबाइल प्रतिबंध का निर्णय चारधाम यात्रा को अधिक पवित्र, सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल मंदिर की गरिमा को बनाए रखेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति और सच्चे दर्शन का अवसर भी देगा। आने वाले समय में यदि श्रद्धालु इस नियम का सहयोग करें, तो चारधाम यात्रा एक आदर्श धार्मिक अनुभव के रूप में और अधिक प्रतिष्ठित होगी।



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