पटना नगर निगम क्षेत्र के सभी वार्डों में “जीविका समिति” गठन की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। नगर विकास एवं आवास विभाग के स्पष्ट निर्देश के अनुसार, आगामी सात दिनों के भीतर प्रत्येक वार्ड में इन समितियों का गठन सुनिश्चित किया जाना है। यह कदम शहरी गरीबों, महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए आजीविका के अवसर बढ़ाने, सामुदायिक भागीदारी मजबूत करने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव द्वारा जारी पत्र में इस प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश “बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका)” के दिशा-निर्देशों के अनुरूप है। पत्र में नगर आयुक्त को त्वरित कार्रवाई करने, समयसीमा का सख्ती से पालन कराने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।
इस संबंध में पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू ने नगर आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। महापौर ने कहा है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी वार्डों में जीविका समितियों का गठन अनिवार्य है और इसके लिए प्राप्त आवेदनों का शीघ्र निष्पादन किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रक्रिया पारदर्शी और समावेशी होनी चाहिए, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।
“जीविका समिति” एक सामुदायिक मंच है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHGs), शहरी गरीबों और स्थानीय निवासियों को जोड़कर आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाती है। इसके माध्यम से महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलते हैं। कौशल विकास, माइक्रो-फाइनेंस और उद्यमिता को बढ़ावा मिलता है। सरकारी योजनाओं की जमीनी निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन संभव होता है। स्थानीय समस्याओं के समाधान में समुदाय की भागीदारी बढ़ती है।
विभागीय निर्देशों के अनुसार , प्रत्येक वार्ड में समिति गठन के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। नगर निगम स्तर पर नामांकन, सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि सात दिनों की समयसीमा में लक्ष्य पूरा हो सके। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो और सभी योग्य आवेदकों को समान अवसर मिले।
पटना जैसे बड़े शहर में शहरी गरीबों की संख्या अधिक है। “जीविका समिति” के माध्यम से उन्हें छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए मार्गदर्शन, बैंकिंग और ऋण सुविधाओं तक पहुंच, प्रशिक्षण और मार्केट लिंकज, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी और लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा और शहर की सामाजिक-आर्थिक संरचना मजबूत होगी।
नगर आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि वे वार्ड स्तर पर नियमित निगरानी करें और प्रगति रिपोर्ट विभाग को भेजें। साथ ही, नागरिकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएं। इससे यह पहल केवल औपचारिक न रहकर वास्तविक बदलाव का माध्यम बनेगी।
सात दिनों के भीतर सभी वार्डों में “जीविका समिति” का गठन पटना नगर निगम के लिए एक समयबद्ध और परिणामोन्मुख कदम है। यदि यह प्रक्रिया पारदर्शिता, सहभागिता और संवेदनशीलता के साथ पूरी होती है, तो शहरी आजीविका सशक्तिकरण के क्षेत्र में यह एक मॉडल पहल बन सकती है। इससे न केवल हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा, बल्कि शहर के समग्र विकास को भी नई गति मिलेगी।
