भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में केरल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भविष्य की शहरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केरल देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने एक “समग्र औ
र दीर्घकालिक शहरी नीति” तैयार की है। यह नीति न केवल वर्तमान चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करती है, बल्कि वर्ष 2050 तक केरल के शहरों और कस्बों को जलवायु-अनुकूल, समावेशी और सुशासित बनाने की स्पष्ट रूपरेखा भी देती है।
इस महत्वाकांक्षी शहरी नीति को शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में औपचारिक रूप से घोषित किया गया। मुख्यमंत्री पिनराइ विजयन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा तैयार मसौदे को मंजूरी दी गई।
इस पहल की घोषणा पहली बार 2023–24 के राज्य बजट में की गई थी, जिससे यह स्पष्ट हो गया था कि राज्य सरकार शहरी भविष्य को लेकर गंभीर और दूरदर्शी सोच रखती है।
नई शहरी नीति की मूल परिकल्पना वर्ष 2050 तक केरल को जलवायु-अनुकूल शहरों और कस्बों के एक निरंतर नेटवर्क के रूप में विकसित करने की है। इसका अर्थ है कि बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और नगर पंचायतों को भी योजनाबद्ध ढंग से विकसित किया जाएगा। नीति में वैज्ञानिक शहरी नियोजन, भूमि उपयोग की दक्षता, हरित बुनियादी ढांचे और आपदा-रोधी निर्माण को प्राथमिकता दी गई है, ताकि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न जोखिमों को कम किया जा सके।
केरल की इस शहरी नीति का एक प्रमुख स्तंभ वैज्ञानिक नियोजन है। नीति के तहत डेटा-आधारित निर्णय, डिजिटल तकनीकों का उपयोग और दीर्घकालिक मास्टर प्लान को अनिवार्य बनाया गया है। इसके साथ ही सुशासन को भी केंद्रीय स्थान दिया गया है। पारदर्शी प्रशासन, जवाबदेही, नागरिक भागीदारी और स्थानीय निकायों को अधिक अधिकार देने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि शहरी विकास केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर भी प्रभावी ढंग से लागू हो।
केरल पहले से ही मजबूत स्थानीय स्वशासन व्यवस्था के लिए जाना जाता है। नई शहरी नीति में नगर निगमों, नगरपालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों को नीति के क्रियान्वयन की धुरी बनाया गया है। स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजनाएं बनाने, नागरिकों से संवाद स्थापित करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए इन संस्थाओं को तकनीकी और वित्तीय सहयोग देने की व्यवस्था की गई है।
इस नीति को ठोस आधार देने के लिए दिसंबर 2023 में सरकार ने ‘केरल शहरी नीति आयोग’ का गठन किया था। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों को शामिल किया गया, ताकि वैश्विक अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को केरल की परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जा सके। आयोग ने गहन अध्ययन, परामर्श और विश्लेषण के बाद मार्च 2025 में मुख्यमंत्री को ‘नव केरल शहरी नीति’ रिपोर्ट सौंपी, जो इस नीति का आधार बनी।
केरल की यह पहल केवल राज्य तक सीमित महत्व नहीं रखती, बल्कि यह अन्य भारतीय राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। जिस तरह से केरल ने दीर्घकालिक सोच, जलवायु संवेदनशीलता और स्थानीय स्वशासन को एक साथ जोड़ा है, वह देश के शहरी विकास विमर्श को नई दिशा देता है। भविष्य में यह नीति यह दिखा सकती है कि कैसे संतुलित विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समावेशन को साथ लेकर चला जा सकता है।
शहरीकरण को चुनौती नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखने की केरल की यह सोच उसे देश के बाकी राज्यों से अलग करती है। नई शहरी नीति के माध्यम से केरल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के शहर केवल कंक्रीट के जंगल नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित, हरित और लचीले शहरी क्षेत्र होने चाहिए। यदि इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो आने वाले दशकों में केरल भारत के शहरी विकास का पथप्रदर्शक बन सकता है।
