रूस में ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है - ‘लेडी विंटर’ का पुतला दहन

Jitendra Kumar Sinha
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रूस की लंबी और कठोर सर्दियाँ केवल मौसम नहीं है, बल्कि जीवन-शैली को भी आकार देती हैं। जब बर्फ से ढकी धरती पर सूर्य की किरणें थोड़ी प्रबल होने लगती हैं, तब वहां के लोग ऋतु परिवर्तन का उत्सव मनाते हैं। इसी परंपरा का जीवंत प्रतीक है “मास्लेनित्सा”, एक ऐसा पर्व जिसमें सर्दी को विदा कर वसंत के आगमन का स्वागत किया जाता है। इस उत्सव का सबसे आकर्षक दृश्य ‘लेडी विंटर’ के पुतले का दहन है, जो शीत ऋतु के अंत की औपचारिक घोषणा माना जाता है।


सेंट पीटर्सबर्ग में मनाया जाने वाला “मास्लेनित्सा” उत्सव अपनी भव्यता और सांस्कृतिक रंगों के लिए प्रसिद्ध है। शहर के चौक, पार्क और ऐतिहासिक स्थलों पर लोग पारंपरिक परिधानों में एकत्र होते हैं। लोकगीतों की धुन, पारंपरिक नृत्य और सामूहिक उल्लास इस पर्व को जीवंत बना देता है। बर्फीली हवा के बीच जब ‘लेडी विंटर’ का पुतला अग्नि के हवाले किया जाता है, तो वह केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामूहिक भावना का प्रतीक बन जाता है।


‘लेडी विंटर’ का पुतला प्रायः भूसे, कपड़े और लकड़ी से बनाया जाता है। इसे रंग-बिरंगे परिधानों से सजाया जाता है, मानो सर्दी स्वयं मानव रूप में उपस्थित हो। पुतले का दहन इस विश्वास से जुड़ा है कि आग की लपटों के साथ ठंड, अंधकार और निष्क्रियता समाप्त हो जाती है। यह परंपरा बताती है कि प्रकृति के चक्र में हर अंत एक नए आरंभ का संकेत होता है।


पुतला दहन के समय लोग उसके चारों ओर इकट्ठा होकर गीत गाते हैं, ताली बजाते हैं और नृत्य करते हैं। जलती हुई लपटें ठंडी हवा में ऊपर उठती हैं, मानो कठोर शीत ऋतु को विदाई दे रही हों। बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक, हर आयु वर्ग इसमें भाग लेता है। यह अनुष्ठान सामूहिक सहभागिता और सामाजिक एकता को मजबूत करता है।


“मास्लेनित्सा” का एक अहम हिस्सा है ब्लिनी- रूसी पैनकेक। गोल और सुनहरे ब्लिनी को सूर्य का प्रतीक माना जाता है। इन्हें मक्खन, शहद, क्रीम या जैम के साथ परोसा जाता है। परिवार और मित्र एक-दूसरे के साथ ब्लिनी साझा करते हैं, जो गर्मजोशी, समृद्धि और नए मौसम की आशा का प्रतीक है। भोजन के माध्यम से यह पर्व लोगों को जोड़ता है और उत्सव की भावना को घर-घर तक पहुंचाता है।


“मास्लेनित्सा” का धार्मिक महत्व भी है। यह रूसी ऑर्थोडॉक्स कैलेंडर में लेंट (उपवास काल) से ठीक पहले मनाया जाता है। इसलिए इसे उपवास से पहले अंतिम उल्लास का समय माना जाता है। सांस्कृतिक रूप से यह पर्व स्लाव सभ्यता की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है, जिसमें प्रकृति, ऋतु और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाया जाता है।


आधुनिक रूस में भी “मास्लेनित्सा” की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। शहरीकरण और आधुनिक जीवनशैली के बावजूद, लोग इस पर्व को बड़े उत्साह से मनाते हैं। सांस्कृतिक संस्थाएं, स्कूल और नगर प्रशासन सामूहिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, जिससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।


‘लेडी विंटर’ के पुतले का दहन केवल एक दृश्य अनुष्ठान नहीं है, बल्कि जीवन के चक्र का उत्सव है। यह सिखाता है कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है और हर कठोरता के बाद कोमलता आती है। मास्लेनित्सा के माध्यम से रूस न केवल सर्दी को विदा करता है, बल्कि आशा, उल्लास और सामुदायिक एकता के साथ वसंत का स्वागत करता है।



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