केंद्र सरकार का बड़ा कदम - पांच ओटीटी प्लेटफॉर्म पर लगा प्रतिबंधित

Jitendra Kumar Sinha
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डिजिटल मनोरंजन के तेजी से विस्तार के साथ भारत में ओटीटी (ओवर-द-टॉप) प्लेटफॉर्म्स की भूमिका लगातार बढ़ी है। फिल्मों, वेब-सीरीज और शॉर्ट वीडियो के माध्यम से ये प्लेटफॉर्म्स दर्शकों तक सीधी पहुंच बनाती हैं। लेकिन इसी बढ़ती लोकप्रियता के साथ कंटेंट की मर्यादा और सामाजिक जिम्मेदारी का सवाल भी उठता रहा है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने अश्लील सामग्री के प्रसारण को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पांच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया है।


नयी दिल्ली से जारी जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण के आरोप में पांच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर मंगलवार को बैन लगाया है। अधिकारियों के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी कानूनी और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं का पालन करते हुए यह निर्णय लिया है। जिन प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया गया है, वे हैं मूडएक्सवीआइपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू।


सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बार-बार ऐसी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी, जो न केवल भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध थी, बल्कि मौजूदा आईटी नियमों और प्रसारण मानकों का भी उल्लंघन करती थी। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनकी सामग्री अश्लीलता, यौन शोषण या सामाजिक विद्वेष को बढ़ावा न दे। मंत्रालय ने पहले चेतावनी और नोटिस जारी किए, लेकिन सुधार न होने पर सख्त कार्रवाई की गई।


पिछले कुछ वर्षों में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की संख्या और दर्शक आधार में जबरदस्त इजाफा हुआ है। सस्ती इंटरनेट सेवाओं और स्मार्टफोन की उपलब्धता ने इस विस्तार को और गति दी है। इस खुली डिजिटल दुनिया में कंटेंट की स्व-नियमन व्यवस्था कई बार कमजोर साबित हुई है। सरकार का मानना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता के नाम पर अश्लीलता या आपत्तिजनक दृश्य परोसना स्वीकार्य नहीं हो सकता है।


अश्लील सामग्री का अनियंत्रित प्रसार खासतौर पर युवाओं और किशोरों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। सामाजिक संगठनों और अभिभावकों की ओर से लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दिखाई जाने वाली सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण हो। सरकार का यह कदम ऐसे ही वर्गों की चिंताओं को संबोधित करता है और यह संदेश देता है कि डिजिटल माध्यम भी कानून से ऊपर नहीं हैं।


इस फैसले के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदार कंटेंट के बीच संतुलन की बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रचनात्मक आजादी जरूरी है, लेकिन उसके साथ सामाजिक जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। कानून का उद्देश्य रचनात्मकता को दबाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कंटेंट समाज के व्यापक हितों के खिलाफ न जाए।


पांच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लगा यह प्रतिबंध अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी है। आने वाले समय में सरकार की निगरानी और सख्त हो सकती है, खासकर तब जब स्व-नियमन तंत्र प्रभावी साबित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्लेटफॉर्म्स समय रहते अपने कंटेंट मानकों में सुधार करें और आयु-उपयुक्त वर्गीकरण को गंभीरता से लागू करें, तो ऐसे कठोर कदमों से बचा जा सकता है।


केंद्र सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह न केवल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को उनके दायित्वों की याद दिलाता है, बल्कि दर्शकों को भी यह भरोसा देता है कि डिजिटल मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता को खुली छूट नहीं दी जाएगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला ओटीटी उद्योग को किस दिशा में ले जाता है, अधिक जिम्मेदार कंटेंट की ओर या और कड़े नियमन की ओर।



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