रहस्य, मनोविज्ञान और अपराध का खौफनाक संगम है - सीरीज “देवखेल”

Jitendra Kumar Sinha
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मराठी वेब सीरीज “देवखेल” दर्शकों को रत्नागिरी के तटीय क्षेत्र में बसे एक छोटे-से गांव देवतली की अंधेरी गलियों में ले जाती है, जहां आस्था, परंपरा और अपराध के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। यह एक मनोवैज्ञानिक अपराध थ्रिलर है, जो केवल हत्या के रहस्य तक सीमित नहीं रहती है, बल्कि मानव मन की गहराइयों और सामूहिक डर को भी उजागर करती है।


देवतली गांव बाहर से शांत, सुंदर और समुद्र की लहरों से घिरा हुआ प्रतीत होता है, लेकिन इसके भीतर एक खौफनाक रहस्य छिपा है। हर साल होली पूर्णिमा की रात को गांव में एक व्यक्ति की रहस्यमय मौत हो जाती है। यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। न कोई गवाह, न कोई ठोस सबूत, बस एक और लाश और बढ़ता हुआ डर। सवाल वही है, हर साल वही रात, वही मौत, मगर क्यों?


“देवखेल” की खासियत यह है कि यह अपराध को केवल बाहरी घटना के रूप में नहीं दिखाती है, बल्कि उसके पीछे छिपी मानसिक, सामाजिक और धार्मिक परतों को भी खोलती है। क्या यह किसी प्राचीन मान्यता से जुड़ा बलिदान है?


क्या गांव का कोई सामूहिक राज है, जिसे छिपाने के लिए हर साल एक जान ली जाती है? या फिर यह किसी एक विकृत मानसिकता वाले व्यक्ति का खेल है? सीरीज इन सवालों के जवाब धीरे-धीरे, तनावपूर्ण माहौल में सामने लाती है।


सीरीज में अंकुश चौधरी, प्राजक्ता माली और मंगेश देसाई जैसे सशक्त कलाकारों ने अपने किरदारों को गहराई दी है। अंकुश चौधरी का किरदार गंभीरता और आंतरिक संघर्ष को बखूबी दर्शाता है। प्राजक्ता माली एक मजबूत, संवेदनशील और जिज्ञासु पात्र के रूप में कहानी को आगे बढ़ाती हैं। मंगेश देसाई गांव के सामाजिक ताने-बाने और रहस्यमय माहौल को विश्वसनीय बनाते हैं। हर पात्र पर शक होता है, और यही दर्शक को अंत तक बांधे रखता है।


निर्देशक चंद्रकांत लता गायकवाड़ ने वातावरण निर्माण पर खास ध्यान दिया है। समुद्र की आवाज, रात का सन्नाटा, गांव की परंपराएं और कैमरा एंगल, सब मिलकर एक डरावना, बेचैन करने वाला अनुभव रचते हैं। कहानी की गति संतुलित है और रहस्य को अनावश्यक रूप से उजागर नहीं किया जाता है।


“देवखेल” सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि जब डर और आस्था मिल जाते हैं, तो इंसान किस हद तक जा सकता है। यह सीरीज दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है और अंत तक रहस्य का जाल बनाए रखती है। जो दर्शक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर और गहरे रहस्यों में रुचि रखते हैं, उनके लिए “देवखेल” एक यादगार अनुभव है।



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