भारतीय सिनेमा में बॉक्स ऑफिस की गणित अब पहले से कहीं ज्यादा जटिल और रणनीतिक हो चुकी है। एक बड़ी फिल्म न केवल दर्शकों का ध्यान खींचती है, बल्कि अपने आसपास रिलीज होने वाली दूसरी फिल्मों के भविष्य को भी प्रभावित कर देती है। बीते साल की सबसे कामयाब फिल्मों में शामिल धुरंधर ने ऐसा ही असर दिखाया था। अब जब “धुरंधर 2” की आहट तेज हो रही है, तो इसके डर से कई फिल्म निर्माता अपनी-अपनी फिल्मों की रिलीज डेट बदलने को मजबूर हो रहे हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड के दमदार अभिनेता सनी देओल और साउथ सुपरस्टार राम चरण की फिल्में भी शामिल हैं।
पिछले साल रिलीज हुई धुरंधर ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तूफान मचाया कि कई बड़ी और मझोली फिल्मों का खेल बिगड़ गया। चाहे मल्टीप्लेक्स हों या सिंगल स्क्रीन, हर जगह इसी फिल्म का दबदबा रहा। नतीजा यह हुआ कि उसी दौरान रिलीज हुई कई फिल्मों को दर्शक नहीं मिल पाए और उनका कलेक्शन उम्मीद से काफी कम रहा। अब जब “धुरंधर 2” की चर्चा जोरों पर है, तो निर्माता इस फिल्म के आसपास अपनी फिल्म रिलीज करने से डर रहे हैं। ट्रेड एनालिस्ट मानते हैं कि ऐसी मेगा फिल्म के साथ टकराव का मतलब है, कम स्क्रीन, कम शो और कमजोर ओपनिंग।
इस रणनीतिक बदलाव की पहली बड़ी मिसाल “गबरू” है। सनी देओल की यह फिल्म पहले मार्च महीने में रिलीज होने वाली थी। फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता भी थी, क्योंकि लंबे समय बाद सनी देओल एक अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं। लेकिन मेकर्स ने बॉक्स ऑफिस समीकरण को देखते हुए फिल्म को पोस्टपोन करने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि “धुरंधर 2” के आसपास रिलीज होने से ‘गबरू’ को अपेक्षित स्क्रीन और प्रचार नहीं मिल पाता। ऐसे में नुकसान से बचने के लिए फिल्म की रिलीज डेट आगे बढ़ा दी गई।
यह असर केवल बॉलीवुड तक सीमित नहीं है। साउथ इंडस्ट्री के बड़े सितारे भी अब रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। पैन इंडिया फिल्मों का बजट और स्केल इतना बड़ा हो चुका है कि एक गलत रिलीज डेट करोड़ों का नुकसान करा सकती है। इसी वजह से अब रिलीज कैलेंडर बनाते वक्त निर्माता सिर्फ अपनी फिल्म की ताकत नहीं, बल्कि सामने आने वाली फिल्मों की क्षमता भी ध्यान में रखते हैं।
साउथ के सुपरस्टार राम चरण की एक्शन-ड्रामा पैन इंडिया फिल्म पेड्डी पहले 27 मार्च को रिलीज होने वाली थी। यह फिल्म हिन्दी, तेलुगु और अन्य भाषाओं में एक साथ रिलीज की तैयारी में थी। लेकिन अब मेकर्स ने इसकी रिलीज डेट बदलकर 30 अप्रैल कर दी है। इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, “धुरंधर 2” के संभावित प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। राम चरण की पिछली फिल्मों ने पैन इंडिया लेवल पर जबरदस्त प्रदर्शन किया है, इसलिए निर्माता किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते हैं।
आज के दौर में फिल्म रिलीज सिर्फ एक तारीख नहीं होती है, बल्कि यह एक पूरा बिजनेस प्लान होता है। स्क्रीन काउंट बड़ी फिल्म आने पर छोटे और मझोले प्रोजेक्ट्स को कम स्क्रीन मिलती हैं। प्रमोशन का शोर मेगा फिल्म के प्रचार में बाकी फिल्मों की आवाज दब जाती है। दर्शकों का फोकस दर्शक एक समय में सीमित फिल्में ही देख पाते हैं। इन्हीं कारणों से निर्माता अब टकराव से बचना ही समझदारी मानते हैं।
फिल्म ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत होगा। बड़ी फिल्मों के आसपास रिलीज स्लॉट लगभग खाली रहने लगेंगे। निर्माता अपनी फिल्मों के लिए “सेफ विंडो” तलाशेंगे, ताकि उन्हें पूरा दर्शक वर्ग और बेहतर कलेक्शन मिल सके। सनी देओल और राम चरण का फैसला इसी बदलते दौर का संकेत है, जहां स्टार पावर के बावजूद भी रणनीति सबसे अहम बन चुकी है।
“धुरंधर 2” का खौफ यह दिखाता है कि भारतीय सिनेमा अब पूरी तरह से प्लानिंग और टाइमिंग का खेल बन गया है। चाहे बॉलीवुड हो या साउथ, बड़े सितारे भी अब बॉक्स ऑफिस क्लैश से बचने में ही भलाई समझते हैं। सनी देओल की ‘गबरू’ और राम चरण की ‘पेड्डी’ का पोस्टपोन होना इसी नई सोच का उदाहरण है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आगे कौन-कौन सी फिल्में अपनी रिलीज डेट बदलती हैं और बॉक्स ऑफिस की यह जंग किस मोड़ पर जाकर थमती है।
