राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्राओं में सम्मान, सुरक्षा और व्यवस्था की पूरी प्रणाली होती है- “ब्लू बुक का प्रोटोकॉल”

Jitendra Kumar Sinha
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भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन की खबरों के बाद एक बार फिर ‘ब्लू बुक’ और वीवीआईपी प्रोटोकॉल की चर्चा तेज हो गई है। भारत में राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक होते हैं, इसलिए उनकी यात्रा से जुड़े नियम केवल औपचारिकता नहीं होती बल्कि संवैधानिक सम्मान और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होता है। जब राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री किसी राज्य या शहर का दौरा करते हैं, तो उनके स्वागत, सुरक्षा, आवागमन, बैठने की व्यवस्था, भाषण, मीडिया कवरेज और यहां तक कि सड़क के मार्ग तक को पहले से तय कर लिया जाता है। इन सभी व्यवस्थाओं के पीछे एक विस्तृत नियमावली काम करती है जिसे ‘ब्लू बुक’ कहा जाता है।

“ब्लू बुक” भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई एक आधिकारिक मार्गदर्शिका है, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों की यात्राओं के लिए विस्तृत नियम और निर्देश दिए जाते हैं। “ब्लू बुक”  एक गोपनीय प्रशासनिक दस्तावेज होता है। इसमें सुरक्षा, प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े नियम होते हैं। इसकी प्रतियां सीमित संख्या में अधिकारियों को दी जाती हैं। हर प्रति को एक विशिष्ट नंबर दिया जाता है। इसे समय-समय पर गृह मंत्रालय अपडेट करता है। आमतौर पर “ब्लू बुक” की प्रति निम्न अधिकारियों के पास सुरक्षित रखी जाती है, जिसमें शामिल होते हैं राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, जिला मजिस्ट्रेट, जिला पुलिस अधीक्षक और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) या सुरक्षा एजेंसियां। इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है कि वे “ब्लू बुक”  के अनुसार, वीवीआईपी यात्रा की तैयारी करें।

भारत में वीवीआईपी सुरक्षा और प्रोटोकॉल की व्यवस्था स्वतंत्रता के बाद धीरे-धीरे विकसित हुई। स्वतंत्रता के शुरुआती वर्षों में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्राओं के लिए कोई विस्तृत लिखित मार्गदर्शिका नहीं थी। अधिकांश व्यवस्थाएं प्रशासनिक अनुभव के आधार पर होती थी। 1960 के दशक में सरकार ने महसूस किया कि शीर्ष पदाधिकारियों की यात्राओं के लिए एक मानकीकृत प्रणाली होना जरूरी है। इसके बाद गृह मंत्रालय ने विस्तृत निर्देश तैयार किया, जो बाद में “ब्लू बुक”  के रूप में विकसित हुआ। आज “ब्लू बुक”  में कई नए पहलू शामिल किए गए हैं, जिसमें आतंकवाद विरोधी सुरक्षा व्यवस्था, डिजिटल निगरानी, मीडिया प्रबंधन और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल है।

“ब्लू बुक”  केवल स्वागत की औपचारिकता नहीं है बल्कि एक व्यापक प्रशासनिक दस्तावेज है,  जिसमें सुरक्षा व्यवस्था, स्वागत प्रोटोकॉल, यात्रा मार्ग, कार्यक्रम की रूपरेखा, बैठने की व्यवस्था, मीडिया कवरेज और आपातकालीन योजना, इन सभी पहलुओं को विस्तार से परिभाषित किया जाता है।

भारत के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक और राज्य के प्रमुख होते हैं। राष्ट्रपति की भूमिका होती है संविधान की रक्षा करना। संसद में अभिभाषण देना। कानूनों को मंजूरी देना और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होना। इसी कारण से उनकी यात्राओं को विशेष सम्मान और सुरक्षा दी जाती है।

प्रोटोकॉल का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं होता है बल्कि कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य होता है संवैधानिक पद का सम्मान, सुरक्षा सुनिश्चित करना, कार्यक्रमों का सुचारू संचालन, राज्य और केंद्र के बीच समन्वय। यदि यह व्यवस्था न हो तो वीवीआईपी कार्यक्रमों में अव्यवस्था हो सकती है।

किसी भी राष्ट्रपति यात्रा की तैयारी कई चरणों में होती है। प्रारंभिक योजना के तहत राष्ट्रपति सचिवालय यात्रा का कार्यक्रम तय करता है। राज्य सरकार को कार्यक्रम का विवरण भेजा जाता है। समन्वय बैठक के अंर्तगत केंद्र और राज्य के अधिकारी बैठक करके व्यवस्थाएं तय करते हैं। पूरे क्षेत्र की सुरक्षा जांच की जाती है। सभी तैयारियों के बाद अंतिम कार्यक्रम जारी होता है।

“ब्लू बुक” के अनुसार, जब राष्ट्रपति किसी राज्य में पहुंचते हैं, तो उनका स्वागत विशेष तरीके से किया जाता है। जिसमे पीआर प्रमुख होते हैं राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक। कई बार मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में कोई वरिष्ठ मंत्री यह जिम्मेदारी निभाते हैं। राष्ट्रपति के आगमन पर एयरपोर्ट पर एक विशेष समारोह आयोजित किया जाता है, जिसमें गार्ड ऑफ ऑनर, राज्यपाल द्वारा स्वागत, मुख्यमंत्री द्वारा अभिवादन और अधिकारियों से परिचय होता है। यह पूरी प्रक्रिया समयबद्ध होती है।

गार्ड ऑफ ऑनर सैन्य सम्मान का प्रतीक होता है। इसमें शामिल होते हैं सेना, नौसेना और वायुसेना। राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होने के कारण उन्हें यह सम्मान दिया जाता है। राष्ट्रपति की सुरक्षा बहुस्तरीय होती है, जिसमें SPG या विशेष सुरक्षा इकाई, राज्य पुलिस, खुफिया एजेंसियां और केंद्रीय सुरक्षा बल शामिल रहते हैं।  इन सभी एजेंसियों के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है।

“ब्लू बुक”  में यात्रा मार्ग की सुरक्षा के लिए विशेष निर्देश दिए जाते हैं। मार्ग की पहले से जांच हो। ट्रैफिक नियंत्रण हो। छतों पर सुरक्षा कर्मी, स्नाइपर तैनाती हो। राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल पर कई व्यवस्थाएं की जाती हैं। बैठने की व्यवस्था। मंच की संरचना। सुरक्षा जांच और मीडिया गैलरी। 

भारत में बैठने की व्यवस्था भी प्रोटोकॉल के अनुसार तय होती है। वॉरंट ऑफ प्रेसीडेंस एक सूची है जिसमें सभी संवैधानिक पदों की प्राथमिकता क्रम तय किया जाता है। यह भारत सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक सूची है। इसमें शामिल पद हैं राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्री। इसी क्रम के अनुसार कार्यक्रमों में बैठने की व्यवस्था होती है।

“ब्लू बुक” में मीडिया के लिए भी नियम तय किया जाता है। सीमित प्रवेश, पूर्व अनुमति, सुरक्षा जांच और निर्धारित स्थान।  “ब्लू बुक” के अनुसार स्वागत करने वाले लोगों की सूची पहले से तैयार की जाती है। क्योंकि सुरक्षा, समय प्रबंधन और प्रोटोकॉल का पालन हो। जब “ब्लू बुक” या प्रोटोकॉल के नियमों का पालन नहीं किया जाता है, तो उसे प्रोटोकॉल उल्लंघन कहा जाता है। उदाहरण के लिए निर्धारित व्यक्ति का स्वागत में अनुपस्थित होना। सुरक्षा नियमों का पालन न होना और कार्यक्रम में अव्यवस्था। हालांकि प्रोटोकॉल कोई दंडात्मक कानून नहीं है, लेकिन इसका उल्लंघन गंभीर माना जाता है और गृह मंत्रालय द्वारा रिपोर्ट मांगना। प्रशासनिक जांच और अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकता है।

भारत में वीवीआईपी सुरक्षा कई घटनाओं के बाद मजबूत की गई है, जैसे- इंदिरा गांधी की हत्या, राजीव गांधी की हत्या, इन घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं। आज वीवीआईपी सुरक्षा में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसमे ड्रोन निगरानी, फेस रिकग्निशन, बम डिटेक्शन सिस्टम और डिजिटल कम्युनिकेशन प्रमुख है।

जब राष्ट्रपति किसी राज्य का दौरा करते हैं, तो राज्य सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और कार्यक्रम आयोजन की व्यवस्था। वीवीआईपी यात्राओं में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय जरूरी होता है और यह समन्वय गृह मंत्रालय, राष्ट्रपति सचिवालय और राज्य सरकार के बीच होती है।

दुनिया के अन्य देशों में भी वीवीआईपी प्रोटोकॉल होते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे देशों में भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री की यात्राओं के लिए विस्तृत नियम होते हैं।

कई बार प्रोटोकॉल के मुद्दे राजनीतिक विवाद का कारण बन जाते हैं। स्वागत में अनुपस्थिति। राजनीतिक मतभेद। प्रशासनिक त्रुटियां। प्रोटोकॉल का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं होती है बल्कि संस्थागत सम्मान बनाए रखना होता है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों का सम्मान और सुरक्षा दोनों बनाए रहें।

“ब्लू बुक” भारत की प्रशासनिक और सुरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल नियमों का दस्तावेज नहीं है बल्कि संवैधानिक पदों के सम्मान और सुरक्षा की गारंटी है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की यात्राओं के दौरान हर छोटी-बड़ी व्यवस्था इसी “ब्लू बुक” के अनुसार तय होती है। स्वागत से लेकर सुरक्षा और कार्यक्रम संचालन तक सब कुछ इसी के अनुसार होता है। हालांकि प्रोटोकॉल कोई कठोर कानून नहीं है, फिर भी यह देश की संस्थागत मर्यादा का प्रतीक है। इसलिए जब भी किसी वीवीआईपी यात्रा में प्रोटोकॉल उल्लंघन की चर्चा होती है, तो वह केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं होता है बल्कि संवैधानिक सम्मान से जुड़ा विषय बन जाता है।



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