तीन मार्च को पटना में 57 मिनट तक दिखेगा “पूर्ण चंद्र ग्रहण”

Jitendra Kumar Sinha
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तीन मार्च को आकाश में एक दुर्लभ और आकर्षक खगोलीय घटना घटित होने जा रही है। इस दिन “पूर्ण चंद्र ग्रहण” होगा, जिसे भारत के पश्चिमी भाग के कुछ स्थानों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों से देखा जा सकेगा। बिहार के लोगों के लिए यह घटना खास है, क्योंकि पटना समेत कई शहरों में ग्रहण का पूर्ण चरण स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी यह एक यादगार अनुभव होगा।


जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाता है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब “चंद्र ग्रहण” की स्थिति बनती है। यदि चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में चला जाता है, तो उसे “पूर्ण चंद्र ग्रहण” कहा जाता है। इस दौरान चंद्रमा का रंग तांबे या लालिमा लिए दिखाई देता है, जिसे आम भाषा में “ब्लड मून” भी कहा जाता है।


तीन मार्च को घटित होने वाला यह “चंद्र ग्रहण” पूर्ण श्रेणी का है। इस ग्रहण की खास बात यह है कि यह भारत में सूर्यास्त के बाद और चंद्रोदय के आसपास दिखाई देगा। आमतौर पर “चंद्र ग्रहण” देर रात या तड़के दिखाई देता है, लेकिन यह ग्रहण शाम के समय दिखाई देगा, जिससे ज्यादा लोग इसे आसानी से देख सकेंगे।


भारतीय मौसम विभाग (भारत मौसम विज्ञान विभाग) के अनुसार, “चंद्र ग्रहण” का समय है ग्रहण प्रारंभ- दोपहर 3 बजकर 20 मिनट, पूर्णता प्रारंभ- शाम 4 बजकर 34 मिनट, पूर्णता समाप्त- शाम 5 बजकर 33 मिनट और ग्रहण समाप्त- शाम 6 बजकर 48 मिनट। इस समय-सारणी के अनुसार, ग्रहण का पूर्ण चरण लगभग 59 मिनट तक रहेगा, जो इसे विशेष बनाता है।


बिहार के अलग-अलग शहरों में “चंद्र ग्रहण” की दृश्य अवधि में थोड़ा अंतर रहेगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पटना में 57 मिनट, मुजफ्फरपुर में 58 मिनट, गया में 56 मिनट और भागलपुर में 1 घंटा 4 मिनट रहेगा। इसका अर्थ है कि भागलपुर के लोग सबसे अधिक समय तक “पूर्ण चंद्र ग्रहण” का आनंद ले सकेंगे, जबकि पटना में भी लगभग एक घंटे तक यह अद्भुत दृश्य दिखाई देगा।


भारत के पश्चिमी हिस्सों के कुछ क्षेत्रों को छोड़ दें तो देश के अधिकांश भागों में यह चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। उत्तर-पूर्वी भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ स्थानों से ग्रहण के पूर्ण चरण का अंत भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। शेष भारत में चंद्रोदय के समय ग्रहण का अंतिम चरण दिखाई देगा।


“सूर्य ग्रहण” के विपरीत, “चंद्र ग्रहण” को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित होता है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे या सुरक्षा उपकरण की आवश्यकता नहीं होती है। दूरबीन या टेलीस्कोप से देखने पर चंद्रमा के रंग और छाया के बदलाव और भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।


भारत में “चंद्र ग्रहण” को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इस दौरान पूजा-पाठ, स्नान और दान को विशेष फलदायी मानते हैं, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक सामान्य खगोलीय घटना है। विशेषज्ञों का मानना है कि परंपराओं का सम्मान करते हुए वैज्ञानिक तथ्यों को समझना भी जरूरी है।


यदि कोई इस बार “चंद्र ग्रहण” नहीं देख पाता है, तो उसे लंबा इंतजार करना होगा। भारत में अगला दृश्य “चंद्र ग्रहण” 06 जुलाई 2028 को होगा, जो कि “आंशिक चंद्र ग्रहण” होगा। इस लिहाज से तीन मार्च का यह पूर्ण चंद्र ग्रहण और भी महत्वपूर्ण बन जाता है।


तीन मार्च का “पूर्ण चंद्र ग्रहण” बिहार समेत पूरे देश के लिए एक विशेष खगोलीय अवसर है। पटना में 57 मिनट तक दिखने वाला यह दृश्य न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आम लोगों के लिए भी रोमांचक अनुभव साबित होगा। साफ आसमान और थोड़ी-सी जागरूकता के साथ हर कोई इस अद्भुत प्राकृतिक घटना का आनंद ले सकता है।




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