झारखंड सरकार ने पर्यटन क्षेत्र को व्यवस्थित और सुदृढ़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में पर्यटकों से सिटी टूरिस्ट टैक्स वसूलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब झारखंड के होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों को 2 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैक्स देना होगा। सरकार का कहना है कि इस टैक्स से प्राप्त राशि का उपयोग राज्य के पर्यटन ढांचे को बेहतर बनाने, पर्यटक सुविधाओं को विकसित करने और नए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने में किया जाएगा।
गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दी गई। बैठक के बाद प्रधान सचिव वंदना दादेल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए सिटी टूरिस्ट टैक्स की व्यवस्था लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह टैक्स होटल में ठहरने वाले पर्यटकों से लिया जाएगा। टैक्स की दर होटल में लागू जीएसटी के आधार पर तय की गई है ताकि छोटे और बड़े होटलों के बीच संतुलन बना रहे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से पर्यटन क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और पर्यटन से होने वाली आय का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
सरकार ने टूरिस्ट टैक्स की दरें होटल में लागू जीएसटी के अनुसार निर्धारित की हैं। इससे होटल उद्योग पर अत्यधिक बोझ नहीं पड़ेगा और टैक्स प्रणाली भी संतुलित रहेगी। नई व्यवस्था के अनुसार, जिन होटलों में जीएसटी लागू नहीं है, वहां भारतीय पर्यटकों से 2 प्रतिशत टूरिस्ट टैक्स लिया जाएगा, और जिन होटलों में 18 प्रतिशत से कम जीएसटी लागू है, वहां पर्यटकों को 2.50 प्रतिशत टैक्स देना होगा। साथ ही, जिन होटलों में 18 प्रतिशत या उससे अधिक जीएसटी लगता है, वहां 5 प्रतिशत टूरिस्ट टैक्स लिया जाएगा। इस तरह होटल के स्तर और श्रेणी के अनुसार, टैक्स की दर तय की गई है, जिससे छोटे होटल और लॉज संचालकों पर अधिक आर्थिक दबाव न पड़े।
नई नीति के तहत विदेशी पर्यटकों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। सरकार ने तय किया है कि विदेशी पर्यटकों से भारतीय पर्यटकों की तुलना में दोगुना टूरिस्ट टैक्स लिया जाएगा। सरकार का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों में विदेशी पर्यटकों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। इससे स्थानीय पर्यटन संरचना को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाए जा सकते हैं। झारखंड सरकार भी इसी मॉडल को अपनाते हुए राज्य में पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहती है।
राज्य सरकार के अनुसार, टूरिस्ट टैक्स से मिलने वाली राशि को सीधे पर्यटन विकास कार्यों में लगाया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से पर्यटन स्थलों का विकास, सड़क और बुनियादी ढांचे का सुधार, पर्यटक सुविधाओं का विस्तार, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, नए पर्यटन सर्किट विकसित करना, जैसे कार्य शामिल होंगे।
झारखंड प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, जंगलों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। नेतरहाट, दशम जलप्रपात, हुंडरू फॉल्स, बेतला नेशनल पार्क और पारसनाथ पहाड़ी जैसे स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। सरकार चाहती है कि इन स्थलों को और बेहतर ढंग से विकसित किया जाए ताकि पर्यटकों की संख्या बढ़े।
इस निर्णय को लेकर होटल और पर्यटन उद्योग में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। कुछ होटल संचालकों का मानना है कि अतिरिक्त टैक्स से पर्यटकों पर थोड़ा आर्थिक बोझ बढ़ेगा। वहीं दूसरी ओर कई विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस टैक्स से मिलने वाली राशि का उपयोग पर्यटन सुविधाओं को सुधारने में किया जाता है तो इससे लंबे समय में पर्यटन उद्योग को ही लाभ होगा। पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सड़क, स्वच्छता, सुरक्षा और ठहरने की सुविधाएं बेहतर होंगी तो अधिक पर्यटक झारखंड का रुख करेंगे, जिससे होटल, परिवहन और स्थानीय व्यापार को भी फायदा मिलेगा।
झारखंड में सिटी टूरिस्ट टैक्स लागू करने का निर्णय पर्यटन क्षेत्र के लिए एक नई नीति की शुरुआत माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इस टैक्स के जरिए अतिरिक्त संसाधन जुटाकर राज्य के पर्यटन ढांचे को मजबूत करना है। यदि इस नीति को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाता है और प्राप्त राजस्व का उपयोग वास्तव में पर्यटन विकास में किया जाता है, तो आने वाले समय में झारखंड देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
