मुंबई के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल “Haji Ali Dargah” में दुनिया का सबसे ऊंचा भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराने का प्रस्ताव सामने आया है। दरगाह ट्रस्ट ने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। इस योजना के अनुसार समुद्र के बीच स्थित दरगाह के निकट एक विशाल पोल स्थापित किया जाएगा, जिस पर रिकॉर्ड ऊंचाई का तिरंगा फहराया जाएगा। यह पहल केवल एक निर्माण परियोजना नहीं है, बल्कि आस्था और राष्ट्रप्रेम के प्रतीक के रूप में देखी जा रही है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह स्थान धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ राष्ट्रीय गौरव का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
मुंबई के वर्ली तट के पास समुद्र के बीच स्थित “हाजी अली दरगाह” देश के सबसे प्रसिद्ध सूफी तीर्थस्थलों में से एक है। यह दरगाह 15वीं शताब्दी के ‘सूफी संत हाजी अली शाह बुखारी’ की स्मृति में बनाई गई थी। प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। खास बात यह है कि यहां केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लोग श्रद्धा के साथ आते हैं। समुद्र के बीच बने इस धार्मिक स्थल तक पहुंचने के लिए एक पतला रास्ता है, जो ज्वार-भाटा के समय पानी में डूब जाता है। ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के पास तिरंगा फहराने का प्रस्ताव आने से इसकी पहचान और भी व्यापक हो सकती है।
दरगाह ट्रस्ट की योजना के अनुसार, यहां जिस पोल पर तिरंगा लगाया जाएगा, उसकी ऊंचाई इतनी होगी कि वह दुनिया के सबसे ऊंचे राष्ट्रीय ध्वजों में शामिल हो सके। भारत के कई शहरों में पहले से ही ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज लगाए गए हैं, जैसे अमृतसर, अटारी और पुणे में बड़े ध्वजस्तंभ स्थापित किए गए हैं। लेकिन समुद्र के बीच किसी धार्मिक स्थल के पास इतने विशाल तिरंगे की स्थापना एक अनोखी पहल होगी। ट्रस्ट का कहना है कि यह तिरंगा दूर से ही दिखाई देगा और मुंबई आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा। क्योंकि यह परियोजना समुद्र के बीच और संवेदनशील तटीय क्षेत्र में प्रस्तावित है, इसलिए इसके लिए कई सरकारी मंजूरियां जरूरी होगी।
महाराष्ट्र सरकार के अतिरिक्त पर्यावरण विभाग, तटीय नियामक प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। समुद्री इलाके में इतनी ऊंचाई का पोल स्थापित करना तकनीकी रूप से भी चुनौतीपूर्ण है, इसलिए विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी। सरकार यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो परियोजना का विस्तृत डिजाइन और लागत तय की जाएगी। यदि यह योजना साकार होती है तो इससे मुंबई के पर्यटन को भी बड़ा फायदा मिल सकता है। हाजी अली दरगाह पहले ही देश-विदेश के पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
एक विशाल तिरंगे के साथ यह स्थान और भी अधिक आकर्षक बन सकता है। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन बढ़ेगा बल्कि देशभक्ति से जुड़े आयोजनों के लिए भी यह एक खास स्थल बन सकता है। विशेष रूप से स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर यहां कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
“हाजी अली दरगाह” पर तिरंगा फहराने का प्रस्ताव कई मायनों में प्रतीकात्मक भी है। यह धार्मिक आस्था और राष्ट्रीय एकता के मेल को दर्शाता है। भारत की विविधता में एकता की भावना ऐसे ही प्रयासों से मजबूत होती है। जब किसी धार्मिक स्थल पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है तो यह संदेश जाता है कि देश की पहचान सभी धर्मों और संस्कृतियों को साथ लेकर चलने में है। दरगाह ट्रस्ट का कहना है कि यह तिरंगा सभी भारतीयों के लिए गर्व का प्रतीक होगा।
इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय महाराष्ट्र सरकार को लेना है। यदि सभी तकनीकी और पर्यावरणीय मंजूरियां मिल जाती हैं तो आने वाले समय में हाजी अली दरगाह के पास दुनिया के सबसे ऊंचे तिरंगों में से एक लहराता दिखाई दे सकता है। यह पहल न केवल मुंबई बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय बन सकती है। आस्था के इस ऐतिहासिक स्थल पर तिरंगा फहरने से यह संदेश भी मजबूत होगा कि भारत की पहचान उसकी विविधता, सहिष्णुता और राष्ट्रप्रेम में निहित है।
