पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में व्यवधान का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर घरेलू रसोई गैस यानि एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से आम लोगों के सामने परेशानी की स्थिति पैदा हो गई है। इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्यों को अतिरिक्त केरोसिन तेल देने की घोषणा की है। सरकार का मानना है कि इससे एलपीजी की कमी से उत्पन्न दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।
सरकार के अनुसार, एलपीजी आपूर्ति में बाधा की मुख्य वजह पश्चिम एशिया के समुद्री मार्गों में उत्पन्न तनाव है। जब अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावित होता है तो ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई पर उसका सीधा असर पड़ता है। एलपीजी भारत में बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय मार्गों में रुकावट आने पर घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसी परिस्थिति के चलते देश के कई हिस्सों में एलपीजी की उपलब्धता कम हो गई है। कुछ जगहों पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति में देरी हो रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बुकिंग के बाद लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
इस चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को अतिरिक्त केरोसिन तेल देने का निर्णय लिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि सामान्य परिस्थितियों में केंद्र सरकार हर तीन महीने में राज्यों को लगभग 10 करोड़ लीटर केरोसिन उपलब्ध कराती है। लेकिन मौजूदा एलपीजी संकट को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर यानि लगभग 4.8 करोड़ लीटर केरोसिन तेल देने का आदेश जारी किया है। इस तरह कुल मिलाकर राज्यों को 14.8 करोड़ लीटर केरोसिन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे उन परिवारों को राहत मिलेगी जो अभी भी केरोसिन आधारित चूल्हों का इस्तेमाल कर सकते हैं या जिनके पास एलपीजी की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
एलपीजी की कमी का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे ढाबे भी गैस की कमी से प्रभावित हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक अस्थायी निर्णय लिया है। सरकार ने होटल और रेस्टोरेंट को एक महीने तक कोयला और बायो-फ्यूल जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करने की अनुमति दी है। इससे व्यावसायिक गतिविधियों को जारी रखने में मदद मिलेगी और एलपीजी की मांग पर भी कुछ हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, यह संकट एक चेतावनी भी है कि देश को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। एलपीजी पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में ऐसे संकटों को और गंभीर बना सकती है। सरकार बायो-फ्यूल, ग्रीन एनर्जी और अन्य घरेलू ऊर्जा स्रोतों के विकास पर तेजी से काम कर रही है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित कुकिंग सिस्टम और बायोगैस संयंत्रों को बढ़ावा देने की योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे गैस का इस्तेमाल सोच-समझकर करें और अनावश्यक बर्बादी से बचें। संकट के समय ऊर्जा संसाधनों का संतुलित उपयोग करना बहुत जरूरी है। यदि उपभोक्ता गैस की बचत करें और वैकल्पिक उपायों का उपयोग करें तो आपूर्ति व्यवस्था को संभालने में सरकार को भी मदद मिलेगी।
एलपीजी संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक घटनाओं का असर घरेलू जीवन पर भी पड़ सकता है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को 14.8 करोड़ लीटर केरोसिन उपलब्ध कराने का निर्णय तत्काल राहत देने वाला कदम माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए ऊर्जा के विविध स्रोतों को विकसित करना और आयात पर निर्भरता कम करना बेहद आवश्यक है। यदि देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता है तो भविष्य में ऐसे संकटों का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।
