तिरुमाला में दर्शन के दौरान के. कविता का ऐलान - जल्द बनाएंगी अपनी अलग राजनीतिक पार्टी

Jitendra Kumar Sinha
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तेलंगाना की राजनीति में एक नया मोड़ देखने को मिल सकता है। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के प्रमुख चंद्रशेखर राव की बेटी और पूर्व सांसद के. कविता ने शुक्रवार को संकेत दिया है कि वह जल्द ही अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने जा रही हैं। तिरुमाला मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के दौरान उन्होंने यह घोषणा की। उनके इस बयान ने तेलंगाना की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।


के. कविता ने कहा है कि वह जनता की अपेक्षाओं और अपने राजनीतिक अनुभव के आधार पर एक नई राजनीतिक दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि आने वाले समय में वह अपने समर्थकों और सहयोगियों के साथ चर्चा कर नई पार्टी की रूपरेखा तय करेगी।


के. कविता का यह फैसला उस समय सामने आया है जब हाल ही में उन्हें दिल्ली शराब नीति मामले में अदालत से राहत मिली है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थी।


इस मामले में उनका नाम सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने लगातार उन्हें निशाने पर लिया था। अदालत से राहत मिलने के बाद उन्होंने कहा है कि न्याय व्यवस्था पर उन्हें पूरा भरोसा था और सच्चाई अंततः सामने आ ही गई। अब इस मामले से मुक्त होने के बाद उन्होंने सक्रिय रूप से राजनीति में अपनी नई भूमिका तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।


के. कविता का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह लंबे समय से बीआरएस से जुड़ी रही हैं। बीआरएस की स्थापना उनके पिता के. चंद्रशेखर राव ने की थी और तेलंगाना राज्य के गठन के बाद इस पार्टी ने लंबे समय तक सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


के. कविता खुद भी पार्टी में सक्रिय रही हैं और उन्होंने निजामाबाद से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। इसके अलावा वह तेलंगाना जागृति नामक संगठन के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं। लेकिन अब अलग पार्टी बनाने की बात सामने आने से यह संकेत मिल रहा है कि वह अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान स्थापित करना चाहती हैं।


के. कविता के इस बयान के बाद उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कई समर्थकों का मानना है कि उनकी नई पार्टी तेलंगाना की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में उभर सकती है। दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर वह वास्तव में नई पार्टी बनाती हैं तो इससे राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। खासकर बीआरएस, कांग्रेस और भाजपा जैसे दलों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा में एक नया आयाम जुड़ सकता है।


विपक्षी दलों ने इस घोषणा को लेकर अभी कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है।


तेलंगाना में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा काफी तीखी है। राज्य में कांग्रेस, भाजपा और बीआरएस के बीच लगातार राजनीतिक संघर्ष देखने को मिलता रहा है। ऐसे में के. कविता की नई पार्टी अगर अस्तित्व में आती है तो यह चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।


विशेषज्ञों का मानना है कि नई पार्टी को मजबूत संगठन और स्पष्ट राजनीतिक एजेंडा की जरूरत होगी। अगर के. कविता जनता के मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने में सफल होती हैं तो वह अपने लिए एक अलग राजनीतिक आधार तैयार कर सकती हैं।


के. कविता ने केवल अपनी अलग पार्टी बनाने की घोषणा की है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी पार्टी का नाम क्या होगा, उसका संगठनात्मक ढांचा कैसा होगा और वह किन मुद्दों को अपनी राजनीति का केंद्र बनाएंगी।


तिरुमाला में दिए गए उनके इस बयान ने साफ कर दिया है कि वह राजनीति में अपनी नई पहचान बनाने के लिए तैयार हैं। अब राजनीतिक विश्लेषकों और जनता दोनों की नजर इस बात पर रहेगी कि उनका अगला कदम क्या होता है और उनकी नई राजनीतिक यात्रा किस दिशा में आगे बढ़ती है।



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