शशिकला की नई पार्टी ‘एआइपीटीएमएमके’ - तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल तेज

Jitendra Kumar Sinha
0

 


तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय और विवादों के कारण सुर्खियों में रहने वाली नेता वी. के. शशिकला ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के नाम का औपचारिक ऐलान कर दिया है। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावनाएँ लगातार चर्चा में हैं। शशिकला ने अपनी पार्टी का नाम एआइपीटीएमएमके (अनैथु इंडिय पुरच्ची थलाईवर मक्कल मुनेत्र कझगम) रखा है। नई पार्टी का चुनाव चिह्न ‘नारियल के पेड़ों का बाग’ तय किया गया है, जिसे वह तमिलनाडु की संस्कृति, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक बता रही हैं। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या शशिकला अपनी पुरानी राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल कर पाएंगी।


वी. के. शशिकला का नाम तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। वह पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की करीबी सहयोगी मानी जाती थीं और वर्षों तक उनके राजनीतिक व निजी जीवन का अहम हिस्सा रहीं। जयललिता के नेतृत्व में पार्टी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) ने राज्य की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई थी। 2016 में जयललिता के निधन के बाद शशिकला अचानक राजनीतिक केंद्र में आ गईं। उस समय उन्हें एआईएडीएमके का महासचिव बनाया गया और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन भ्रष्टाचार के एक मामले में सजा होने के कारण उन्हें जेल जाना पड़ा, जिससे उनका राजनीतिक भविष्य अस्थायी रूप से ठहर गया।


जेल से बाहर आने के बाद शशिकला ने कुछ समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। लेकिन पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों और नेतृत्व संघर्ष के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में बना रहा। आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने उन्हें औपचारिक रूप से एआईएडीएमके से निष्कासित कर दिया। इसके बाद से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह जल्द ही अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगी। अब उनके द्वारा नई पार्टी के नाम की घोषणा ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया है।


शशिकला की नई पार्टी का नाम “अनैथु इंडिय पुरच्ची थलाईवर मक्कल मुनेत्र कझगम” रखा गया है, जिसका संक्षिप्त रूप एआइपीटीएमएमके है। तमिल भाषा में इस नाम का अर्थ broadly “सभी भारत के क्रांतिकारी नेता के लोगों का प्रगतिशील संगठन” जैसा माना जा रहा है। पार्टी का चुनाव चिह्न ‘नारियल के पेड़ों का बाग’ रखा गया है। तमिलनाडु में नारियल का पेड़ समृद्धि, कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा प्रतीक माना जाता है। शशिकला ने कहा कि यह प्रतीक राज्य की सांस्कृतिक पहचान और विकास की आकांक्षा को दर्शाता है।


तमिलनाडु की राजनीति पारंपरिक रूप से दो बड़े दलों के बीच केंद्रित रही है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK)। इन दोनों दलों के बीच दशकों से सत्ता का संघर्ष चलता रहा है। ऐसे में शशिकला की नई पार्टी का गठन इस राजनीतिक समीकरण में नई हलचल पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शशिकला अपने पुराने समर्थकों को फिर से संगठित करने में सफल होती हैं, तो वह एआईएडीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती हैं। हालांकि यह भी सच है कि नई पार्टी को संगठन खड़ा करने और जनाधार बढ़ाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी।


शशिकला के समर्थकों का मानना है कि वह अभी भी तमिलनाडु के कई क्षेत्रों में प्रभाव रखती हैं। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पहचान बनी हुई है। नई पार्टी के गठन के बाद उनके समर्थकों में उत्साह देखने को मिल रहा है। कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह कदम “जयललिता की विरासत” को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है।


नई पार्टी की घोषणा के साथ कई चुनौतियाँ भी सामने हैं। मजबूत संगठन का निर्माण। वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था। राज्य स्तर पर जनाधार बनाना। बड़े दलों के प्रभाव का मुकाबला करना। इसके अलावा राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तमिलनाडु में पहले से ही स्थापित दलों के बीच जगह बनाना आसान नहीं होगा।


तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से नाटकीय घटनाओं और मजबूत व्यक्तित्वों के लिए जानी जाती रही है। वी. के. शशिकला द्वारा नई पार्टी एआइपीटीएमएमके की घोषणा इसी राजनीतिक परंपरा की एक नई कड़ी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शशिकला अपनी नई पार्टी के माध्यम से राज्य की राजनीति में फिर से मजबूत उपस्थिति दर्ज करा पाती हैं या नहीं। आने वाले चुनाव और राजनीतिक घटनाक्रम ही तय करेंगे कि उनकी यह नई राजनीतिक पारी कितनी सफल होती है।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top