ऐतिहासिक खोज - मंगल पर पहली बार दिखी ‘बिजली’

Jitendra Kumar Sinha
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मानव सभ्यता सदियों से आकाश की ओर देखती रही है। कभी मंगल ग्रह को युद्ध का देवता माना गया, तो कभी रहस्यमय लाल ग्रह। आज विज्ञान के युग में वही मंगल एक बार फिर सुर्खियों में है। कारण है ‘मंगल ग्रह पर पहली बार बिजली जैसी गतिविधि का सबूत मिलना’।

NASA के वैज्ञानिकों ने अपने अंतरिक्ष यान द्वारा रिकॉर्ड किए गए विशेष रेडियो सिग्नल, जिन्हें “व्हिस्लर” कहा जाता है, के माध्यम से यह संकेत प्राप्त किया है कि मंगल के वातावरण में बिजली जैसी घटना घटित हुई है। यह खोज केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह मंगल पर जीवन की संभावनाओं, मौसम प्रणाली, रासायनिक प्रक्रियाओं और भविष्य में मानव मिशनों की तैयारी को लेकर नए दरवाजे खोल सकती है।

Mars Reconnaissance Orbiter (MRO) जैसे यान वर्षों से मंगल की परिक्रमा कर रहे हैं। इन यानों का उद्देश्य है मंगल की सतह, वातावरण, धूल भरी आंधियों और चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन करना। वैज्ञानिकों ने एक लाख से अधिक रेडियो रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया है। इनमें से एक विशेष सिग्नल ने उनका ध्यान आकर्षित किया है। यह सिग्नल पृथ्वी पर बिजली गिरने के बाद बनने वाले रेडियो सिग्नल जैसा था जिसे वैज्ञानिक भाषा में “Whistler Wave” कहा जाता है।

जब पृथ्वी पर बिजली कड़कती है, तो केवल चमक और गड़गड़ाहट ही नहीं होती, बल्कि वह रेडियो तरंगें भी उत्पन्न करती है। ये तरंगें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में घूमती हुई विशिष्ट “सीटी जैसी” ध्वनि उत्पन्न करती हैं इसी कारण इन्हें “Whistler” कहा जाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल से मिला सिग्नल भी इसी प्रकार का है। इसका अर्थ है कि मंगल के वातावरण में विद्युत आवेश (electric charge) मौजूद है। वहां बिजली जैसी गतिविधि संभव है। वायुमंडलीय रसायनिकी सक्रिय हो सकती है।

मंगल का वातावरण पृथ्वी की तुलना में बहुत पतला है। यह मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) से बना है। फिर प्रश्न उठता है कि क्या इतने पतले वातावरण में बिजली संभव है? वैज्ञानिकों का मत है कि मंगल पर अक्सर विशाल धूल भरी आंधियां चलती हैं। इन आंधियों के दौरान धूल के कण आपस में टकराते हैं। टकराव से स्थैतिक विद्युत (static electricity) उत्पन्न हो सकती है। यही प्रक्रिया बिजली की शुरुआत कर सकती है। यदि यह सत्य है, तो मंगल की धूल भरी आंधियां केवल मौसम की घटना नहीं हैं, बल्कि विद्युत गतिविधि का स्रोत भी हो सकती हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अरबों वर्ष पहले मंगल पर पानी मौजूद था। Mars Pathfinder और अन्य मिशनों ने नदी जैसी संरचनाओं और झीलों के प्रमाण खोजे हैं। अगर उस समय वातावरण घना था, तो बिजली भी संभव रही होगी, ठीक वैसे ही जैसे पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय।

1950 के दशक में वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया था ‘Miller-Urey experiment’। इस प्रयोग में उन्होंने प्रारंभिक पृथ्वी के वातावरण जैसा वातावरण बनाया और उसमें बिजली का संचार किया। परिणामस्वरूप अमीनो एसिड बने, जो जीवन की बुनियादी इकाइयाँ हैं। यदि मंगल पर भी कभी बिजली हुई है, तो संभव है वहां जैविक अणु बने हों। रासायनिक प्रतिक्रियाएं हुई हो। जीवन की प्रारंभिक परिस्थितियाँ मौजूद रही हो।  

मंगल पर कभी-कभी पूरी सतह को ढक लेने वाली वैश्विक धूल आंधियां चलती हैं। इन आंधियों के दौरान सूर्य का प्रकाश कम हो जाता है। तापमान में बदलाव होता है। धूल कणों के घर्षण से विद्युत आवेश पैदा होता है। यह परिदृश्य बिजली जैसी घटना के लिए उपयुक्त हो सकता है।

SpaceX और NASA भविष्य में मंगल पर इंसान भेजने की तैयारी कर रहे हैं। यदि मंगल पर बिजली होती है, तो अंतरिक्ष यानों की सुरक्षा जरूरी होगी। आवास मॉड्यूल को विद्युत सुरक्षा की जरूरत होगी। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित बनाना होगा। इस खोज से इंजीनियरों को भविष्य की योजनाओं में महत्वपूर्ण बदलाव करने पड़ सकते हैं। इस खोज के बाद वैज्ञानिक मंगल के चुंबकीय क्षेत्र का पुनः अध्ययन करेंगे। धूल आंधियों में विद्युत गतिविधि की जांच करेंगे और अधिक संवेदनशील उपकरण भेजने की योजना बनाएंगे।

व्हिस्लर सिग्नल यह दर्शाता है कि मंगल का वातावरण पूरी तरह निष्क्रिय नहीं है। वहां जटिल भौतिक प्रक्रियाएं चल रही हैं। यह खोज यह भी साबित करती है कि मंगल अभी भी “जीवित” ग्रह की तरह सक्रिय है। उसकी जलवायु प्रणाली गतिशील है। भविष्य के अध्ययन से और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। वैज्ञानिक अब और अधिक डेटा का विश्लेषण करेंगे। संभव है कि आने वाले वर्षों में मंगल पर नियमित बिजली गतिविधि का प्रमाण मिले। वहां के मौसम का पूरा मॉडल तैयार हो। जीवन की संभावना पर ठोस निष्कर्ष निकले।

मंगल पर बिजली के संकेत मिलना मानव इतिहास की एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है। यह खोज याद दिलाती है कि ब्रह्मांड में अभी भी कई रहस्य छिपे हैं। क्या मंगल पर कभी जीवन था? क्या भविष्य में इंसान वहां बसेंगे? क्या लाल ग्रह दूसरी पृथ्वी बन सकता है? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, लेकिन इतना तय है कि मंगल अब पहले से कहीं अधिक रोचक हो गया है।



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