इंदौर में 125 फीट नीचे बनेगा “मेट्रो स्टेशन”

Jitendra Kumar Sinha
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स्वच्छता, नवाचार और तेज शहरी विकास के लिए देशभर में पहचान बना चुका इंदौर अब मेट्रो परियोजना के माध्यम से एक और इतिहास रचने की ओर अग्रसर है। मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत छोटा गणपति क्षेत्र में प्रस्तावित अंडरग्राउंड स्टेशन न केवल शहर की यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, बल्कि यह इंदौर का अब तक का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन भी होगा।

मिट्टी परीक्षण (Soil Investigation) रिपोर्ट के बाद लिए गए फैसले के अनुसार, यह स्टेशन जमीन से करीब 38 मीटर (लगभग 125 फीट) नीचे बनाया जाएगा। आमतौर पर जहां अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन 22 से 25 मीटर की गहराई पर बनते हैं, वहीं छोटा गणपति स्टेशन का यह नया डिजाइन इसे तकनीकी दृष्टि से भी खास बनाता है।

इंदौर मेट्रो परियोजना मध्यप्रदेश के सबसे महत्वाकांक्षी शहरी परिवहन प्रोजेक्ट्स में से एक है। यह परियोजना मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के माध्यम से संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी, यातायात दबाव और प्रदूषण की समस्या को कम करते हुए सुरक्षित, तेज़ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। मेट्रो नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा एलिवेटेड है, लेकिन शहर के व्यस्त और ऐतिहासिक क्षेत्रों में अंडरग्राउंड सेक्शन को प्राथमिकता दी गई है, ताकि सतह पर कम से कम दखल हो।

छोटा गणपति इलाका इंदौर के पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक है। यह धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। यहां सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं, आसपास पुराने भवन और व्यस्त बाजार मौजूद हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन का निर्माण शुरू से ही एक चुनौतीपूर्ण कार्य माना जा रहा था। स्थानीय लोगों की आशंकाएं, बगीचे की जमीन, आसपास के निर्माण और धार्मिक आस्थाओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन पर विशेष सावधानी बरती गई है।

मिट्टी परीक्षण किसी भी बड़े निर्माण प्रोजेक्ट की बुनियाद होता है। इसके जरिए जमीन की परतों, उनकी मजबूती, जलस्तर और चट्टानी संरचना की जानकारी मिलती है। मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा कराए गए परीक्षण में सामने आया कि ऊपरी परत अपेक्षाकृत सॉफ्ट सॉइल की है और हार्ड रॉक (पथरीली परत) अपेक्षा से काफी नीचे, लगभग 125 फीट गहराई पर मिली है। सामान्य परिस्थितियों में यदि हार्ड रॉक ऊपर मिल जाती है, तो स्टेशन कम गहराई पर बनाया जा सकता है। लेकिन यहां ऐसा न होने के कारण स्टेशन को और गहराई तक ले जाने का फैसला किया गया है।

गहराई में स्थित हार्ड रॉक पर निर्माण करने से स्टेशन की मजबूती और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित होता है। ऊपरी सतह के पास खुदाई करने से पुराने भवनों में दरारें, धंसाव या कंपन की आशंका रहती है। अधिक गहराई पर निर्माण से यह जोखिम कम होता है। मेट्रो कॉर्पोरेशन के अनुसार, स्टेशन को गहराई पर बनाने से सतह पर कम जगह घिरेगी और बगीचे की निर्धारित जमीन के अलावा अतिरिक्त भूमि की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्षेत्र में चल रहे विरोध को देखते हुए यह स्पष्ट किया गया कि किसी भवन को तोड़ने की नौबत नहीं आएगी।

125 फीट नीचे स्टेशन बनाना आसान काम नहीं है। इसके लिए आधुनिक इंजीनियरिंग और विशेष तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। टनल बोरिंग मशीन (TBM), हाई-पावर ड्रिलिंग और कटिंग उपकरण, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, कंपन और धंसाव मापने के सेंसर, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और गहराई में जलस्तर का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि पानी रिसाव से संरचना को नुकसान न पहुंचे।

भारत में कुछ शहरों में गहरे अंडरग्राउंड स्टेशन पहले से मौजूद हैं, लेकिन इंदौर का छोटा गणपति स्टेशन मध्यप्रदेश में अपनी तरह का पहला उदाहरण होगा। दिल्ली मेट्रो औसतन 20-30 मीटर, मुंबई मेट्रो (कुछ सेक्शन) 30-35 मीटर, इंदौर (छोटा गणपति): 38 मीटर (125 फीट)। यह इंदौर को तकनीकी रूप से अग्रणी शहरों की कतार में खड़ा करता है।

छोटा गणपति के साथ-साथ एमजी रोड क्षेत्र में भी अंडरग्राउंड स्टेशन का काम तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। एमडी रोड थाने के पीछे स्थित खेल मैदान क्षेत्र में मल्टीलेवल पार्किंग हटाई गई। पोकलेन मशीनों से गहरी खुदाई जारी है। बड़ा गड्ढा तैयार कर स्ट्रक्चरल कार्य की तैयारी चल रही है। यह स्टेशन शहर के व्यावसायिक केंद्र को मेट्रो नेटवर्क से सीधे जोड़ेगा।

शुरुआत में छोटा गणपति क्षेत्र के निवासियों में चिंता थी कि क्या घरों को नुकसान होगा? क्या बगीचे और सार्वजनिक स्थान खत्म हो जाएंगे? मेट्रो कॉर्पोरेशन की तकनीकी प्रस्तुति और आश्वासनों के बाद अब कई लोग इसे विकास की दिशा में जरूरी कदम मानने लगे हैं। अंडरग्राउंड स्टेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सतह पर दृश्य प्रदूषण कम होता है। पेड़ों और खुले स्थानों को बचाया जा सकता है। ट्रैफिक बाधित हुए बिना निर्माण संभव होता है। इंदौर जैसे शहर के लिए यह संतुलन बेहद अहम है।

मेट्रो स्टेशन के आसपास व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। निर्माण और संचालन के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। मेट्रो कनेक्टिविटी से आसपास के इलाकों की संपत्ति का मूल्य बढ़ेगा। आधुनिक आर्किटेक्चर, हाई-स्पीड लिफ्ट और एस्केलेटर, दिव्यांगजन और बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाएं, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम युक्त यह स्टेशन केवल एक ट्रांजिट पॉइंट नहीं, बल्कि आधुनिक शहरी जीवन का प्रतीक होगा।

छोटा गणपति जैसे पारंपरिक और आस्था से जुड़े क्षेत्र में अत्याधुनिक मेट्रो स्टेशन का निर्माण यह दिखाता है कि इंदौर कैसे परंपरा और तकनीक के बीच संतुलन साध रहा है।

125 फीट नीचे बनने वाला छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन केवल इंजीनियरिंग की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इंदौर की विकासशील सोच, तकनीकी क्षमता और संवेदनशील शहरी नियोजन का प्रमाण है। यह परियोजना बताती है कि अगर योजना, तकनीक और संवाद सही हो, तो विकास और विरासत दोनों साथ चल सकते हैं। आने वाले वर्षों में जब यात्री इस गहरे स्टेशन से मेट्रो में सफर करेंगे, तो यह इंदौर के बदलते चेहरे और भविष्य की दिशा की एक जीवंत मिसाल होगी।



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