बिहार के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 30 जून तक शत-प्रतिशत ‘अपार’ (APAAR) कार्ड बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। राज्य परियोजना निदेशक (BEPC) नवीन कुमार ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
‘अपार’ कार्ड यानि Automated Permanent Academic Account Registry एक डिजिटल पहचान संख्या है, जो हर छात्र के शैक्षणिक रिकॉर्ड को एकीकृत रूप में सुरक्षित रखती है। यह कार्ड छात्रों के नामांकन, उपस्थिति, परीक्षा परिणाम और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों को डिजिटल रूप से जोड़ने का माध्यम बनेगा। इससे छात्रों का डेटा एक स्थान पर सुरक्षित रहेगा और भविष्य में स्कूल बदलने या उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान सुविधा होगी।
बिहार में ‘अपार’ कार्ड निर्माण की वर्तमान स्थिति असमान दिखाई देती है। सरकारी स्कूलों में नामांकित छात्रों में से लगभग 69.23 प्रतिशत बच्चों का अपार कार्ड बन चुका है, जबकि निजी स्कूलों में यह आंकड़ा मात्र 38.77 प्रतिशत तक सीमित है। यह अंतर प्रशासन के लिए चिंता का विषय है और इसी को ध्यान में रखते हुए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
सभी छात्रों का समय पर अपार कार्ड बनाने के लिए राज्य सरकार ने हर शनिवार को मेगा कैंप आयोजित करने का निर्णय लिया है। इन कैंपों में स्कूल स्तर पर ही छात्रों का पंजीकरण और सत्यापन किया जाएगा। इससे अभिभावकों को अलग से कहीं जाने की जरूरत नहीं होगी और प्रक्रिया तेजी से पूरी हो सकेगी।
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन बच्चों का आधार कार्ड पहले से बना हुआ है लेकिन उनका अपार कार्ड अभी तक नहीं बन पाया है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाए। ऐसे मामलों को एक सप्ताह के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, जिन बच्चों का अभी तक आधार कार्ड नहीं बना है, उनके लिए प्रखंड स्तर पर संचालित आधार केंद्रों पर आधार बनवाने की जिम्मेदारी स्कूल प्रधानों को दी गई है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी छात्र आधार के अभाव में अपार कार्ड से वंचित न रहे।
इस अभियान में निजी स्कूलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां अपार कार्ड निर्माण की गति धीमी है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी और निजी, दोनों प्रकार के स्कूलों को समान रूप से इस आदेश का पालन करना होगा। निजी स्कूलों को भी छात्रों का डेटा समय पर अपलोड कर अपार कार्ड बनवाना अनिवार्य होगा।
अपार कार्ड योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम पहल है। इससे न केवल छात्रों का शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, बल्कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। भविष्य में यह कार्ड छात्रों के लिए एक स्थायी शैक्षणिक पहचान के रूप में काम करेगा, जिससे उन्हें विभिन्न शैक्षणिक सेवाओं और योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा।
हालांकि इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं, जैसे तकनीकी समस्याएं, इंटरनेट की कमी या अभिभावकों की जागरूकता का अभाव। लेकिन मेगा कैंप और प्रशासनिक सख्ती के माध्यम से इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
30 जून की समय सीमा को देखते हुए बिहार सरकार ने शिक्षा विभाग को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। यह पहल न केवल छात्रों के लिए लाभकारी होगी, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक और डिजिटल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
