भारत में जनगणना एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सामाजिक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से देश की जनसंख्या, संसाधनों और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन किया जाता है। वर्ष 2027 की जनगणना के तहत पटना जिले में बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई हैं। इस प्रक्रिया का पहला चरण, यानि स्वगणना एक मई को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद दूसरा चरण शुरू हो जाएगा, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर मकानों और परिवारों का विवरण एकत्र करेंगे।
दो मई 2027 से पटना जिले में प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की गणना का कार्य प्रारंभ करेंगे। यह कार्य 31 मई तक चलेगा। इस दौरान प्रगणक न केवल मकानों की संख्या दर्ज करेंगे, बल्कि परिवारों से 33 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब भी प्राप्त करेंगे। इन सवालों में परिवार की संरचना, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक स्थिति और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल होगी।
पटना जिले में इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए कुल 12,071 प्रगणकों की नियुक्ति की गई है। इनके साथ 1468 पर्यवेक्षक और 164 फील्ड ट्रेनर भी तैनात किए गए हैं, जो पूरे कार्य की निगरानी और मार्गदर्शन करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया 46 चार्जों (क्षेत्रीय इकाइयों) में विभाजित की गई है ताकि कार्य को व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सके।
जनगणना कार्य को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए 46 चार्जों को दो प्रशासनिक स्तरों में बांटा गया है। जिला प्रशासन के अधीन 40 चार्जों के तहत 40 जनगणना अधिकारी, 8695 प्रगणक, 1468 पर्यवेक्षक और 164 फील्ड ट्रेनर तैनात किए जा रहे हैं। ये सभी अधिकारी और कर्मचारी ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्य करेंगे। नगर निगम के अधीन 6 चार्ज जो पटना नगर निगम के 75 वार्डों में 6 जनगणना अधिकारी, 3376 प्रगणक, 563 पर्यवेक्षक और 58 फील्ड ट्रेनर प्रतिनियुक्त किए जा रहे हैं। ये टीम शहरी क्षेत्रों में गणना का कार्य संभालेगी।
इस अभियान में केवल जनगणना विभाग ही नहीं, बल्कि लगभग 45 अन्य विभागों के कर्मियों को भी शामिल किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शिक्षक, विकास मित्र, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका, आशा कार्यकर्ता, नगर निगम एवं अन्य निकायों के कर्मचारी शामिल हैं। यह बहु-विभागीय सहयोग इस बात को सुनिश्चित करता है कि जनगणना कार्य व्यापक, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरा हो।
जनगणना 2027 में डिजिटल माध्यम का भी व्यापक उपयोग किया गया है। स्वगणना पोर्टल के जरिए अब तक लगभग दो लाख परिवारों के मुखियाओं ने अपनी जानकारी स्वयं भर दी है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि डेटा की सटीकता भी बढ़ी है। हालांकि, जिन परिवारों ने अभी तक स्वगणना नहीं की है, उनके लिए प्रगणक घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
प्रगणकों द्वारा पूछे जाने वाले 33 सवालों में कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है, जैसे- परिवार के सदस्यों की संख्या, आयु और लिंग, शिक्षा का स्तर, रोजगार की स्थिति, आवास की स्थिति, सुविधाओं की उपलब्धता (पानी, बिजली, शौचालय आदि)। इन सभी जानकारियों के आधार पर सरकार भविष्य की योजनाएं और नीतियां तैयार करती है।
पटना में जनगणना 2027 का यह अभियान एक व्यापक और सुव्यवस्थित प्रयास है, जिसमें हजारों कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। दो मई से शुरू होने वाला घर-घर सर्वेक्षण इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, जो 31 मई तक चलेगा। नागरिकों का सहयोग इस कार्य की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
