बिहार सरकार ने राज्य के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 6991 किसान सलाहकारों के लिए ₹194 करोड़ 48 लाख 13 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह निर्णय न केवल किसान सलाहकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अहम है, बल्कि राज्य के किसानों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से भी लिया गया है।
किसान सलाहकार योजना की शुरुआत वर्ष 2009 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, उर्वरकों के सही उपयोग और सरकारी योजनाओं की जानकारी देना है। किसान सलाहकार गांव-गांव जाकर किसानों से सीधे संवाद स्थापित करते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान सुझाते हैं। यह योजना किसानों और कृषि विभाग के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करती है।
इस स्वीकृत राशि के तहत किसान सलाहकारों को अब प्रतिमाह ₹21,000 का मानदेय दिया जाएगा। यह पहले की तुलना में एक बड़ा सुधार है। शुरुआत में वर्ष 2009 में उन्हें मात्र ₹2,500 प्रति माह मिलते थे। इसके बाद समय-समय पर इसमें वृद्धि की गई- 2012 में ₹5,000, 2014 में ₹6,000, 2015 में ₹8,000 और 2017 में ₹12,000, अब ₹21,000 प्रति माह का मानदेय उनकी मेहनत और योगदान को उचित सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सरकार ने केवल मानदेय बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रखा है, बल्कि किसान सलाहकारों की सामाजिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा है। नई व्यवस्था के तहत यदि किसी किसान सलाहकार का निधन हो जाता है, तो उनके परिजनों को ₹4 लाख का अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। यह प्रावधान उनके परिवार को आर्थिक सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किसान सलाहकारों को मिलने वाले बेहतर मानदेय का सीधा असर किसानों पर भी पड़ेगा। जब सलाहकार आर्थिक रूप से सुरक्षित और संतुष्ट होंगे, तो वे और अधिक समर्पण के साथ किसानों की सहायता कर सकेंगे। इससे खेती में नई तकनीकों का प्रसार तेज होगा और उत्पादन में वृद्धि होने की संभावना बढ़ेगी।
बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे में किसान सलाहकारों को मजबूत बनाना पूरे कृषि तंत्र को मजबूत करने जैसा है। सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने, फसल उत्पादकता सुधारने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में सहायक सिद्ध होगा।
₹194 करोड़ की यह स्वीकृति किसान सलाहकारों के लिए एक बड़ी राहत और सम्मान का प्रतीक है। इससे न केवल उनके जीवन स्तर में सुधार होगा, बल्कि राज्य के लाखों किसानों को भी बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा। यदि इसी तरह कृषि क्षेत्र में निवेश और सुधार जारी रहे, तो बिहार कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
