आभा सिन्हा, पटना।
पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में एक ऐसा मंदिर भी है, जो अपनी रहस्यमयी पहचान, अनूठी परंपराओं और गहरी आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यह है मरघट वाले हनुमान मंदिर। यह मंदिर यमुना के किनारे स्थित है और सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह एक श्मशान (मरघट) के पास स्थित है, जिससे इसका नाम पड़ा “मरघट वाले हनुमान जी”। जहां एक ओर लोग मृत्यु से भयभीत होते हैं, वहीं यह मंदिर सिखाता है कि भय के पार ही भक्ति और मुक्ति का मार्ग है।
यह मंदिर यमुना नदी के किनारे, पुरानी दिल्ली के यमुना बाजार क्षेत्र में स्थित है। इसके आसपास श्मशान घाट और प्राचीन घाट हैं, जो इसे एक विशिष्ट आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करते हैं। पास में स्थित हैं कई ऐतिहासिक स्थल, यहां का वातावरण शांत, गंभीर और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा होता है। नदी, श्मशान और मंदिर का संगम इसे अद्वितीय बनाता है।
“मरघट वाले हनुमान” नाम अपने आप में रहस्यमय लगता है। सामान्यतः लोग मंदिरों को जीवन और उत्सव से जोड़ते हैं, लेकिन यह मंदिर मृत्यु के स्थान-श्मशान-के पास स्थित है। इस नाम के पीछे दो प्रमुख कारण हैं। पहला स्थान का प्रभाव- मंदिर श्मशान घाट के पास स्थित है, इसलिए इसे मरघट वाला कहा जाता है। दूसरा आध्यात्मिक संदेश- यहां यह संदेश दिया जाता है कि जीवन और मृत्यु एक ही चक्र के दो पहलू हैं और भगवान हनुमान हर स्थिति में रक्षक हैं।
इस मंदिर से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि इसका संबंध सीधे रामायण काल से है। जब लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे और हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आए, तब युद्ध समाप्ति के बाद हनुमान जी ने यहां विश्राम और तपस्या की थी। कुछ मान्यताओं के अनुसार, युद्ध के बाद हनुमान जी ने श्मशान के पास रहकर यह संदेश दिया कि “जीवन और मृत्यु दोनों में भगवान का ही वास है।”
मरघट वाले हनुमान मंदिर का निर्माण अत्यंत सरल लेकिन प्रभावशाली है। मंदिर का ढांचा पारंपरिक उत्तर भारतीय शैली में है। मुख्य गर्भगृह में हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित है। प्रतिमा पर सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाने की परंपरा है। मंदिर के आसपास पुराने घाट और पीपल के वृक्ष हैं।
इस मंदिर की सबसे खास बात है यहां की हनुमान जी की प्रतिमा। हनुमान जी यहां शांत और गंभीर मुद्रा में विराजमान हैं। प्रतिमा पर हमेशा सिंदूर का लेप होता है। भक्त चमेली के तेल और लाल चोला अर्पित करते हैं। यहां की प्रतिमा को “जागृत स्वरूप” माना जाता है, यानि भक्तों की प्रार्थना का तुरंत प्रभाव होता है।
सामान्यतः लोग श्मशान से दूर रहते हैं, लेकिन यह मंदिर इस धारणा को बदलता है। मृत्यु अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। भय को त्यागकर भक्ति को अपनाना चाहिए। हनुमान जी हर परिस्थिति में रक्षा करते हैं। यह मंदिर साधकों और तांत्रिकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषकर अमावस्या और शनिवार की रात को यहां साधना की जाती है।
मरघट वाले हनुमान मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना होती है। सुबह की आरती, हनुमान चालीसा पाठ, सिंदूर और तेल अर्पण और शनि दोष निवारण पूजा। मंगलवार, शनिवार और अमावस्या के दिन यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है।
हनुमान जयंती के अवसर पर इस मंदिर में भव्य आयोजन होता है। अखंड रामायण पाठ, भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण, विशेष सजावट होता है। इस दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं।
इस मंदिर के बारे में कई चमत्कारिक कथाएं प्रचलित हैं। यहां दर्शन करने से भय दूर होता है। बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है। मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। कई भक्तों का मानना है कि यहां आने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
मरघट वाले हनुमान मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं हैं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लोगों को जीवन और मृत्यु का सत्य समझाना, भय और अंधविश्वास को दूर करना और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना।
भारत में कई प्रसिद्ध हनुमान मंदिर हैं, जैसे कनॉट प्लेस हनुमान मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर। लेकिन मरघट वाले हनुमान मंदिर की विशेषता यह है कि यह श्मशान के पास स्थित है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। निकटतम मेट्रो स्टेशन: कश्मीरी गेट है, बस और ऑटो की सुविधा उपलब्ध है, यमुना बाजार तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।मरघट वाले हनुमान जी का सुबह या शाम के समय दर्शन करना बेहतर है। अमावस्या के दिन भीड़ अधिक होती है।
मरघट वाले हनुमान मंदिर यह सिखाता है कि “जहां भय समाप्त होता है, वहीं से भक्ति शुरू होती है।” यह मंदिर जीवन के सबसे बड़े सत्य-मृत्यु-को स्वीकार करने और उससे ऊपर उठने की प्रेरणा देता है।
मरघट वाले हनुमान मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है। यह स्थान जीवन के गहरे सत्य से परिचित कराता है और सिखाता है कि भगवान हर स्थिति में साथ हैं, चाहे वह जीवन हो या मृत्यु।
