“पातालविजय हनुमान”

Jitendra Kumar Sinha
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आभा सिन्हा, पटना 

मध्यप्रदेश की पवित्र भूमि पर स्थित सांवेर का “पातालविजय हनुमान मंदिर” न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अनोखे स्वरूप और रहस्यमयी मान्यताओं के कारण भी अत्यंत विशेष माना जाता है। इंदौर से लगभग 30 किलोमीटर और उज्जैन से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं को चमत्कृत कर देता है। यहां स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा उल्टी अवस्था में, यानि सिर के बल पाताल की ओर जाती हुई दिखाई देती है, जो इसे विश्व के सबसे अद्वितीय मंदिरों में शामिल करती है।


भारत में हनुमानजी के हजारों मंदिर हैं, लेकिन सांवेर का यह मंदिर अपनी विशिष्टता के कारण अलग पहचान रखता है। यहां हनुमानजी की प्रतिमा सामान्य रूप से खड़ी या बैठी नहीं है, बल्कि उल्टी है, जैसे वे धरती को चीरते हुए पाताल लोक की ओर जा रहे हों। यही कारण है कि इसे "पातालविजय हनुमान" या "पातालगामी हनुमान" कहा जाता है। यह दृश्य पहली बार देखने वाले व्यक्ति को चौंका देता है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था और विश्वास का प्रतीक है।


इस मंदिर की विशेषता के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो सीधे रामायण काल से संबंधित मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, जब भगवान राम और लक्ष्मण का अपहरण अहिरावण नामक राक्षस ने कर लिया था, तब वह उन्हें पाताल लोक में ले गया। उस समय हनुमान जी ने पाताल लोक में प्रवेश करने के लिए पृथ्वी को भेदते हुए नीचे की ओर प्रस्थान किया। यही वह क्षण था जब हनुमानजी ने उल्टी मुद्रा में पाताल में प्रवेश किया। उन्होंने वहां अहिरावण का वध कर भगवान राम और लक्ष्मण को मुक्त कराया। इस मंदिर में स्थापित प्रतिमा उसी ऐतिहासिक और पौराणिक क्षण का प्रतीक मानी जाती है।


मंदिर का मुख्य आकर्षण हनुमानजी की उल्टी प्रतिमा है। इसमें उनका सिर नीचे की ओर और पैर ऊपर की ओर दिखाई देते हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे धरती के भीतर प्रवेश कर रहे हों। प्रतिमा जमीन में धंसी हुई है। ऐसा लगता है कि इसका पूरा आकार दिखाई नहीं देता। कुछ लोग मानते हैं कि यह प्रतिमा स्वयंभू है, यानि यह अपने आप प्रकट हुई है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही एक अलग प्रकार की ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है। श्रद्धालु यहां ध्यान, पूजा और प्रार्थना के लिए आते हैं।


स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। विशेष रूप से शत्रु बाधा से मुक्ति, नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, मानसिक शांति, संकटों का निवारण होता है।  यहां मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ होती है, हनुमान जयंती पर भव्य आयोजन होता है और भक्त "चोला चढ़ाने" की परंपरा निभाते हैं। 



हनुमान जयंती के अवसर पर यह मंदिर विशेष रूप से जीवंत हो उठता है। पर्व के मुख्य आकर्षण है भव्य शोभायात्रा, भजन-कीर्तन, प्रसाद वितरण, हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति। इसके अलावा राम नवमी, दीपावली और नवरात्रि जैसे पर्वों पर भी यहां विशेष पूजा होती है।


कुछ लोग इसे पूरी तरह आस्था से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने की कोशिश करते हैं। संभवतः यह किसी प्राचीन शिल्पकला का उदाहरण हो या फिर प्राकृतिक रूप से बनी आकृति। लेकिन इसकी उल्टी संरचना अब भी एक रहस्य बनी हुई है। कई श्रद्धालु बताते हैं कि मंदिर में प्रवेश करते ही उन्हें एक विशेष ऊर्जा का अनुभव होता है, जो मानसिक शांति प्रदान करती है।


इस मंदिर की इंदौर से दूरी लगभग 30 किमी और उज्जैन से दूरी लगभग 20 किमी है। बस, टैक्सी, निजी वाहनसे यहां पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन इंदौर है और एयरपोर्ट देवी अहिल्याबाई होल्कर। घूमने का सर्वोत्तम समय है अक्टूबर से मार्च और हनुमान जयंती का समय विशेष होता है। 


यह मंदिर न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि स्थानीय समाज और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। यहां मेलों का आयोजन होता है, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है और सामाजिक एकता का प्रतीक है। कई भक्तों ने अपने अनुभव साझा किए हैं कि "यहां आने के बाद मेरी समस्या हल हो गई"। "मन को असीम शांति मिली" और "हनुमानजी की शक्ति का अद्भुत अनुभव हुआ"।


भारत में कई प्रसिद्ध हनुमान मंदिर हैं, जैसे सालासर बालाजी मंदिर, हनुमान गढ़ी और मेहंदीपुर बालाजी मंदिर। लेकिन सांवेर का पातालविजय हनुमान मंदिर अपनी उल्टी प्रतिमा के कारण अद्वितीय है।


पातालविजय हनुमान मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह आस्था, इतिहास, पौराणिक कथा और रहस्य का अद्भुत संगम है। यहां की उल्टी प्रतिमा यह सिखाती है कि शक्ति और भक्ति के सामने असंभव भी संभव हो सकता है। यह मंदिर न केवल भक्तों के लिए बल्कि शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।



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