आभा सिन्हा, पटना।
आंध्र प्रदेश की पवित्र धरती पर स्थित परिताला अंजनेय स्वामी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि श्रद्धा, शक्ति और सांस्कृतिक वैभव का जीवंत प्रतीक है। यह मंदिर विशेष रूप से भगवान हनुमान की 135 फीट ऊँची विशाल प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है, जो दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।
यह मंदिर विजयवाड़ा के समीप परितला गांव में स्थित है और दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। विजयवाड़ा से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित परितला गांव राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। यह स्थान आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में आता है और अपनी धार्मिक पहचान के कारण देशभर में प्रसिद्ध हो चुका है।
यह मंदिर मुख्यतः भगवान हनुमान को समर्पित है, जिन्हें दक्षिण भारत में “अंजनेय” के नाम से जाना जाता है। “अंजनेय” शब्द का अर्थ है, अंजनी के पुत्र, अर्थात हनुमान।
परिताला अंजनेय स्वामी मंदिर का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, लेकिन इसकी ख्याति तेजी से फैली है। मंदिर का निर्माण 21वीं सदी के प्रारंभ में किया गया था। स्थानीय श्रद्धालुओं और दानदाताओं के सहयोग से इस विशाल प्रतिमा का निर्माण संभव हुआ। इस मंदिर का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं था, बल्कि यह क्षेत्र के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास का केंद्र बनना भी था।
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 135 फीट ऊँची हनुमान प्रतिमा है, जो भारत की सबसे ऊँची हनुमान प्रतिमाओं में से एक है। इसकी ऊँचाई 135 फीट है, इस मंदिर के निर्माण में कंक्रीट और विशेष धातु मिश्रण का उपयोग किया गया है, भगवान हनुमान खड़े हैं और आशीर्वाद की मुद्रा में हैं, इसका रंग चमकदार नारंगी है, जो शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक है। यह प्रतिमा इतनी विशाल है कि इसे दूर से ही देखा जा सकता है और यह पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुकी है।
भगवान हनुमान को शक्ति, भक्ति और सेवा का प्रतीक माना जाता है। रामायण में उनका चरित्र अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे भगवान राम के परम भक्त हैं और उनकी भक्ति अद्वितीय मानी जाती है। परिताला अंजनेय स्वामी मंदिर में श्रद्धालु विशेष रूप से संकटों से मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ, मानसिक शांति और शत्रुओं से रक्षा के लिए आते हैं।
मंदिर में प्रतिदिन नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को यहाँ श्रद्धालुओं की भीड़ अधिक होती है। प्रमुख अनुष्ठान में शामिल है अभिषेक, आरती, हनुमान चालीसा पाठ, सुंदरकांड पाठ। त्योहारों के समय यहाँ विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
मंदिर की स्थापत्य शैली पारंपरिक दक्षिण भारतीय वास्तुकला पर आधारित है। विशाल प्रांगण, सुंदर प्रवेश द्वार और व्यवस्थित परिसर इसकी विशेषता हैं। प्रतिमा के चारों ओर खुला क्षेत्र है, जिससे श्रद्धालु आसानी से दर्शन कर सकते हैं।
इस मंदिर ने परितला गांव को एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल बना दिया है। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं और क्षेत्र का आर्थिक विकास हुआ है। पर्यटन में वृद्धि हुई है, स्थानीय व्यवसायों का विकास हुआ है और सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है।
भगवान हनुमान को “चिरंजीवी” माना जाता है, अर्थात वे आज भी जीवित हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। यहाँ आने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर उनकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
मंदिर में कई प्रमुख त्योहार बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं जैसे हनुमान जयंती, राम नवमी, दीपावली। इन अवसरों पर मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। निकटतम शहर है विजयवाड़ा, सड़क मार्ग है राष्ट्रीय राजमार्ग से सीधा संपर्क, रेल और हवाई मार्ग है विजयवाड़ा से। यहां पार्किंग, प्रसाद वितरण, स्वच्छ परिसर, विश्राम स्थल की सुविधा है।
यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं है, बल्कि एक पर्यटन आकर्षण भी है। यहाँ आने वाले लोग विशाल प्रतिमा के साथ फोटो लेते हैं, शांत वातावरण का आनंद लेते हैं और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करते हैं।
परिताला अंजनेय स्वामी मंदिर आस्था, भक्ति और अद्भुत स्थापत्य का एक अनूठा संगम है। 135 फीट ऊँची हनुमान प्रतिमा न केवल एक धार्मिक प्रतीक है, बल्कि यह मानव की आस्था और समर्पण का भी प्रतीक है। यह मंदिर सिखाता है कि सच्ची भक्ति और विश्वास से कोई भी कार्य असंभव नहीं होता है।
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