राजधानी पटना में बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों के असर ने अब परिवहन व्यवस्था पर भी असर डालना शुरू कर दिया है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान ऑटो चालकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता चुना है। प्रगतिशील ऑटो रिक्शा चालक यूनियन बिहार के बैनर तले आठ जून को ऑटो चालक हड़ताल पर जाने का ऐलान किया गया है। इस हड़ताल के कारण शहर की आम जनता, विशेषकर रोजाना ऑटो से यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी सात सूत्री मांगों पर सरकार और प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।
पिछले कुछ समय से पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका सीधा असर ऑटो चालकों की आय पर पड़ा है। ऑटो चालक पहले की तुलना में अधिक खर्च वहन कर रहे हैं, जबकि किराया दरों में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई है। ऑटो चालकों का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा ईंधन पर खर्च हो जाता है। ऐसे में घर-परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। बढ़ती महंगाई, वाहन रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स की कीमतें और अन्य खर्चों ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कठिन बना दिया है। इसी कारण यूनियन लंबे समय से ऑटो किराये में वृद्धि की मांग कर रही है, ताकि चालकों को राहत मिल सके।
प्रगतिशील ऑटो रिक्शा चालक यूनियन बिहार ने केवल किराया बढ़ाने की मांग नहीं की है, बल्कि अन्य कई समस्याओं को भी उठाया है। यूनियन ने अपनी सात सूत्री मांगों में शहर की सड़क व्यवस्था, पार्किंग और अवैध स्टैंड जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी है। इन मांगों में प्रमुख रूप से शामिल हैं -
ऑटो किराये में बढ़ोतरी
मल्टी लेवल पार्किंग ऑटो स्टैंड से स्टेशन गोलंबर तक सड़क की मरम्मत
अवैध ई-रिक्शा स्टैंड हटाना
ऑटो चालकों की सुविधाओं में सुधार
यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना
स्टैंड संचालन में पारदर्शिता
ऑटो चालकों की समस्याओं का स्थायी समाधान
यूनियन का कहना है कि इन समस्याओं के कारण चालकों को रोजाना आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
यूनियन पदाधिकारी नवीन मिश्रा ने बताया है कि स्टेशन गोलंबर से डाक बंगला चौराहा और मल्टी मॉडल हब से जीपीओ गोलंबर तक कई स्थानों पर ई-रिक्शा के अवैध स्टैंड संचालित हो रहे हैं। इन अवैध स्टैंडों के कारण ऑटो चालकों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है। ऑटो चालक आरोप लगा रहे हैं कि ई-रिक्शा चालकों द्वारा कई जगहों पर अनधिकृत रूप से सवारी उठाई जाती है। इससे ऑटो चालकों तक यात्री नहीं पहुंच पाते। नतीजतन उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। यूनियन का कहना है कि प्रशासन को इस दिशा में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सभी प्रकार के वाहनों के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो सके।
ऑटो चालकों ने मल्टी लेवल पार्किंग ऑटो स्टैंड से स्टेशन गोलंबर तक सड़क मरम्मत की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि खराब सड़कों के कारण वाहनों को नुकसान पहुंचता है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। बरसात के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। सड़क पर गड्ढे, जलजमाव और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था के कारण यात्रियों और चालकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऑटो चालक मानते हैं कि बेहतर सड़कें न केवल उनकी कमाई बढ़ा सकती हैं बल्कि शहर की परिवहन व्यवस्था को भी सुगम बना सकती हैं।
यदि आठ जून को ऑटो हड़ताल होती है तो इसका सबसे अधिक असर आम लोगों पर पड़ सकता है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार और दफ्तर जाने वाले हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पटना जैसे बड़े शहर में ऑटो परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। बड़ी संख्या में लोग रोजाना ऑटो के माध्यम से अपनी यात्रा पूरी करते हैं। ऐसे में हड़ताल होने पर यात्रियों को वैकल्पिक साधनों की तलाश करनी पड़ सकती है। विशेष रूप से छात्र, कर्मचारी, बुजुर्ग और बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
ऑटो चालकों की मांगों को केवल विरोध या आंदोलन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह उन लोगों की आवाज है जो रोजाना शहर की परिवहन व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे यूनियन प्रतिनिधियों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करें। यदि समय रहते समस्याओं का समाधान कर लिया जाए तो हड़ताल टल सकती है और आम जनता को भी राहत मिल सकती है। परिवहन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि चालक, प्रशासन और सरकार तीनों मिलकर संतुलित और व्यावहारिक समाधान खोजें। तभी शहर की रफ्तार बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेगी।
