आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा आम देखा है जिसकी कीमत सोने से भी ज्यादा हो? ओडिशा के मलकानगिरी जिले के एक किसान ने अपने बगीचे में दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिने जाने वाले ‘मियाजाकी’ आम की खेती कर सबको चौंका दिया है। जापान में उगाए जाने वाले इस विशेष आम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब तीन लाख रुपये प्रति किलो तक बतायी जाती है। गहरे लाल रंग, अनोखी मिठास और खुशबू के कारण यह आम दुनिया भर में बेहद लोकप्रिय है। इस उपलब्धि ने किसान को नई पहचान तो दी है, लेकिन साथ ही चिंता भी बढ़ा दी है। आमों की सुरक्षा के लिए किसान अब दिन-रात पेड़ के नीचे पहरा देने को मजबूर हैं।
‘मियाजाकी’ आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी प्रांत में उगाया जाता है। इसे “एग ऑफ द सन” यानि “सूरज का अंडा” भी कहा जाता है। इस आम की सबसे बड़ी विशेषता इसका गहरा लाल रंग और बेहद मीठा स्वाद है। सामान्य आमों की तुलना में इसमें शर्करा की मात्रा अधिक होती है, जिसके कारण इसका स्वाद अलग और अधिक आकर्षक लगता है। यह आम सिर्फ स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि पौष्टिकता के लिए भी प्रसिद्ध है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड की मात्रा अधिक होती है। जापान में इसे लग्जरी फल माना जाता है और बड़े-बड़े उपहारों तथा विशेष आयोजनों में इसका उपयोग किया जाता है।
मलकानगिरी जिले के किसान देबा ने कुछ वर्ष पहले प्रयोग के तौर पर इस दुर्लभ आम की खेती शुरू की थी। शुरुआत में उन्हें इस आम के बारे में बहुत कम जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इंटरनेट और कृषि विशेषज्ञों की मदद से इसकी देखभाल करना सीखा। ‘मियाजाकी’ आम की खेती सामान्य आमों की तुलना में काफी कठिन मानी जाती है। इसके लिए विशेष तापमान, नमी और देखभाल की आवश्यकता होती है। पेड़ों की नियमित निगरानी करनी पड़ती है और फलों को कीटों तथा मौसम के प्रभाव से बचाना होता है। देबा ने धैर्य और मेहनत से इस चुनौती को स्वीकार किया। अब जब उनके बगीचे में लाल रंग के खूबसूरत आम तैयार हुए, तो लोग दूर-दूर से उन्हें देखने पहुंचने लगे।
महंगे आमों की खबर फैलते ही किसान की चिंता भी बढ़ गयी। तीन लाख रुपये किलो कीमत वाले आम किसी के भी आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। इसी डर से किसान अब रात में पेड़ों के नीचे ही सोकर रखवाली कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन आमों की चोरी का खतरा लगातार बना हुआ है। कई बार लोग बगीचे के आसपास घूमते नजर आते हैं। इसलिए परिवार के सदस्य भी बारी-बारी से निगरानी कर रहे हैं। भारत में पहले भी ‘मियाजाकी’ आम की चोरी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ राज्यों में किसानों को इन आमों की सुरक्षा के लिए निजी गार्ड और सीसीटीवी कैमरे तक लगाने पड़े थे। ऐसे में देबा की चिंता स्वाभाविक है।
दुनिया के कई देशों में ‘मियाजाकी’ आम की भारी मांग है। जापान, थाईलैंड और कुछ यूरोपीय देशों में इसे प्रीमियम फल के रूप में बेचा जाता है। इसकी कीमत गुणवत्ता और आकार के आधार पर तय होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही मार्केटिंग और निर्यात की सुविधा मिले, तो भारत के किसान भी इस आम की खेती से लाखों रुपये कमा सकते हैं। भारत की जलवायु कई हिस्सों में इस आम की खेती के लिए अनुकूल साबित हो सकती है। हालांकि, इसकी खेती में जोखिम भी कम नहीं है। पौधों की देखभाल, सुरक्षा और बाजार तक पहुंच बनाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है।
देबा की सफलता अब ओडिशा के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है। इससे यह साबित होता है कि आधुनिक तकनीक और नई सोच अपनाकर किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार और कृषि विभाग ऐसे किसानों को तकनीकी सहायता और बाजार उपलब्ध कराएं, तो विदेशी फलों की खेती भारत में एक बड़ा व्यवसाय बन सकती है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
ओडिशा के मलकानगिरी जिले के किसान द्वारा उगाया गया ‘मियाजाकी’ आम सिर्फ एक फल नहीं है, बल्कि मेहनत, नवाचार और साहस की मिसाल है। यह कहानी दिखाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद किसान नई राह चुनकर असाधारण सफलता हासिल कर सकते हैं। हालांकि, इस सफलता के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। महंगे आमों की सुरक्षा से लेकर सही बाजार तक पहुंच बनाने का संघर्ष अभी बाकी है। फिर भी देबा की यह उपलब्धि देशभर के किसानों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का संदेश देती है।
