निजी स्कूलों को 90 दिनों में मिलेगी स्वीकृति

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में निजी विद्यालयों की स्थापना और संचालन से जुड़ी प्रक्रिया को अब और तेज तथा पारदर्शी बनाया जाएगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब निजी स्कूलों की प्रस्वीकृति यानि मान्यता देने में अनावश्यक देरी नहीं होगी। विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया है कि निजी विद्यालयों से संबंधित सभी आवेदनों का निष्पादन 90 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। यह फैसला राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्कूल संचालकों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


पिछले कई वर्षों से यह शिकायत लगातार सामने आ रही थी कि निजी विद्यालयों की मान्यता संबंधी फाइलें महीनों तक जिला कार्यालयों में लंबित पड़ी रहती थी। कई स्कूल संचालकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कहीं निरीक्षण में देरी होती थी तो कहीं दस्तावेजों की जांच लंबी खिंच जाती थी। इससे न केवल स्कूल प्रबंधन परेशान होता था बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूल संचालन पर भी असर पड़ता था। शिक्षा विभाग की हाल ही में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) से जुड़े कई मामलों के साथ-साथ निजी विद्यालयों की प्रस्वीकृति के आवेदन भी समय पर निपटाए नहीं जा रहे हैं। इसके बाद विभाग ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल निर्देश जारी किए।


शिक्षा विभाग ने साफ कहा है कि अब किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि आवेदन प्राप्त होने के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर निरीक्षण, दस्तावेज सत्यापन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएं। इसके साथ ही प्राथमिक शिक्षा निदेशक को पूरे मामले की निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह है कि जिला स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई न हो और सभी आवेदनों पर समयबद्ध निर्णय लिया जा सके।


राज्य सरकार के इस फैसले से निजी विद्यालय संचालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अक्सर स्कूल भवन, शिक्षक नियुक्ति, आधारभूत सुविधाओं और अन्य मानकों को पूरा करने के बावजूद मान्यता मिलने में लंबा समय लग जाता था। इससे कई नए स्कूलों का संचालन प्रभावित होता था। अब 90 दिनों की समयसीमा तय होने से स्कूल प्रबंधन को यह स्पष्ट रहेगा कि उनका आवेदन कब तक स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाएगा। इससे अनिश्चितता खत्म होगी और शिक्षा क्षेत्र में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय का सकारात्मक प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा। जब नए विद्यालयों को समय पर स्वीकृति मिलेगी तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा के अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे। इससे छात्रों और अभिभावकों को बेहतर स्कूल चुनने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, मान्यता प्रक्रिया में तेजी आने से अवैध रूप से संचालित विद्यालयों पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा। सरकार चाहती है कि सभी निजी विद्यालय निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराएं।


शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में आरटीई कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष जोर दिया गया। विभाग ने कहा कि निजी विद्यालयों को मान्यता देते समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम के सभी प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। खासकर गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित सीटों, आधारभूत सुविधाओं और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति जैसे मुद्दों की गंभीरता से जांच होगी। सरकार का उद्देश्य केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाना नहीं है बल्कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।


यह फैसला प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहले किसी आवेदन के लंबित रहने पर जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती थी, लेकिन अब समयसीमा निर्धारित होने से अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। यदि किसी जिले में आवेदन समय पर निपटाए नहीं जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है। इससे सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ने की संभावना है।


बिहार सरकार लगातार शिक्षा क्षेत्र में सुधार के प्रयास कर रही है। स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं के विकास, शिक्षकों की नियुक्ति और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के बाद अब निजी विद्यालयों की स्वीकृति प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो आने वाले समय में राज्य में निजी शिक्षा व्यवस्था अधिक संगठित, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बन सकती है। इससे सबसे अधिक लाभ छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा, जिन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्राप्त हो सकेगा।



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