सरकारी खर्च में कटौती - अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर छह माह की रोक

Jitendra Kumar Sinha
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राज्य सरकार ने सरकारी खर्चों को नियंत्रित करने और संसाधनों के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने अगले छह महीने तक सरकारी खर्च पर अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर रोक लगाने का फैसला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह निर्णय वित्तीय अनुशासन, संसाधनों की बचत और प्रशासनिक कार्यों में मितव्ययिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। यह फैसला केवल विदेश यात्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा और ईंधन की बचत के लिए भी कई निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे बदलावों से बड़े स्तर पर सरकारी खर्च में कमी लाई जा सकती है।


सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राएं अक्सर अध्ययन, प्रशिक्षण, सम्मेलन या प्रशासनिक अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए होती हैं। हालांकि इन यात्राओं पर सरकार को भारी राशि खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में सरकार ने फिलहाल छह महीने तक इन खर्चों को रोककर प्राथमिक आवश्यकताओं पर संसाधनों के उपयोग का निर्णय लिया है। इस कदम के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। सरकारी खर्च में कमी लाना, वित्तीय अनुशासन बनाए रखना, अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण, राज्य के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग को प्रोत्साहन देना। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में जब तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है, तब कई बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जा सकता है।


सरकार ने जिलों और मुख्यालय स्तर पर कार्यरत अधिकारियों को कारपूलिंग अपनाने के निर्देश भी दिए हैं। इसका मतलब है कि एक ही दिशा में जाने वाले अधिकारी एक ही वाहन का उपयोग करें ताकि ईंधन की खपत कम हो सके। मुख्यालय स्तर पर अपर मुख्य सचिव और प्रधान सचिवों को तथा जिला स्तर पर जिलाधिकारियों को इस संबंध में व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कारपूलिंग से कई फायदे हो सकते हैं। पेट्रोल और डीजल की बचत, सरकारी वाहन खर्च में कमी, पर्यावरण संरक्षण में मदद, ट्रैफिक दबाव कम होना और सरकारी बजट पर सकारात्मक प्रभाव। आज कई निजी कंपनियां भी कर्मचारियों के लिए इसी मॉडल को अपनाकर खर्च और प्रदूषण दोनों कम कर रही हैं।


सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि पिछले वर्ष की तुलना में बिजली और ईंधन की खपत कम करने की दिशा में विशेष प्रयास किए जाएं। इसके तहत कार्यालयों में अनावश्यक बिजली उपयोग रोकने और ऊर्जा बचत के उपाय लागू करने को कहा गया है। कई बार देखा जाता है कि कार्यालयों में काम समाप्त होने के बाद भी लाइट, एसी और अन्य उपकरण चलते रहते हैं। इससे बिजली की बर्बादी होती है। यदि विभाग गंभीरता से इस निर्देश का पालन करते हैं तो ऊर्जा की बड़ी बचत संभव है।


राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय बैठकों को अधिकतम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित करने का भी निर्देश दिया है। पिछले कुछ वर्षों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इससे अधिकारियों को यात्रा नहीं करनी पड़ती और समय के साथ-साथ धन की भी बचत होती है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से होने वाले लाभ— है यात्रा खर्च में कमी, समय की बचत, त्वरित निर्णय प्रक्रिया, ईंधन की बचत, डिजिटल प्रशासन को मजबूती, कोविड काल के दौरान यह व्यवस्था काफी प्रभावी साबित हुई थी और अब इसे प्रशासनिक कार्यशैली का स्थायी हिस्सा बनाया जा रहा है।


अधिसूचना में कार्यालयों में सेंट्रल स्विचिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस व्यवस्था के तहत कार्यालय के सभी विद्युत उपकरणों को एक केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कार्यालय बंद होने के बाद सभी बिजली उपकरण स्वतः बंद हो जाएं और अनावश्यक ऊर्जा खपत न हो। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार सेंट्रल स्विचिंग सिस्टम अपनाने से बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।


सरकार का यह फैसला केवल खर्च घटाने की पहल नहीं है बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है। अब पारंपरिक तरीकों के बजाय तकनीक आधारित और संसाधन-संरक्षण वाली व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन किया गया तो इससे सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा, पर्यावरण संरक्षण को मदद मिलेगी और प्रशासन अधिक जिम्मेदार बन सकेगा।


आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि छह महीने की इस अवधि के बाद सरकार इन कदमों को स्थायी रूप देती है या नहीं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि राज्य सरकार खर्च नियंत्रण और संसाधन बचत को लेकर गंभीर नजर आ रही है।



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