छत्तीसगढ़ स्कूलों में गायत्री मंत्र हुआ अनिवार्य

Jitendra Kumar Sinha
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छत्तीसगढ़ सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के साथ प्रतिदिन गायत्री मंत्र का पाठ अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, देशभक्ति और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे धर्म और शिक्षा के मिश्रण से जोड़कर देखा है। इस निर्णय ने शिक्षा, संस्कृति और राजनीति के क्षेत्र में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।


राज्य सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अब सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगान, राष्ट्रीय गीत तथा गायत्री मंत्र का सामूहिक उच्चारण किया जाएगा। इसके साथ ही सांस्कृतिक, शैक्षणिक और मूल्य आधारित गतिविधियों को भी विद्यालयी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि आधुनिक शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों के व्यक्तित्व विकास, नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। इसी सोच के तहत यह कदम उठाया गया है।


गायत्री मंत्र को भारतीय वैदिक परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्र माना जाता है। यह मंत्र ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की कामना का प्रतीक है। इसका मूल उद्देश्य मनुष्य के बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास की प्रार्थना करना है। मंत्र का अर्थ सूर्य स्वरूप परम चेतना से यह प्रार्थना करना है कि वह हमारी बुद्धि को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे। अनेक शिक्षाविद और संस्कृत विद्वान मानते हैं कि गायत्री मंत्र का नियमित उच्चारण मानसिक एकाग्रता, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इसी कारण सरकार का तर्क है कि इसका पाठ किसी धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक एवं बौद्धिक विकास के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।


शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं है, बल्कि जीवन मूल्यों को आत्मसात करने की प्रक्रिया भी है। वर्तमान समय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तनाव और सामाजिक चुनौतियों के बीच विद्यालयों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। सरकार का मानना है कि प्रार्थना सभा में सकारात्मक संदेश, राष्ट्रीय गीत और प्रेरणादायक गतिविधियां छात्रों में अनुशासन, समयपालन, सामूहिकता और देशप्रेम की भावना विकसित करेंगी। इसके अलावा भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव भी मजबूत होगा। विद्यालयों में पहले से ही योग, ध्यान और नैतिक शिक्षा जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। गायत्री मंत्र को भी उसी श्रृंखला का एक हिस्सा माना जा रहा है।


इस निर्णय को लेकर कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्र को अनिवार्य बनाना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता है। विपक्ष का तर्क है कि सरकारी विद्यालय विभिन्न धर्मों और समुदायों के बच्चों के लिए समान रूप से खुले होते हैं। ऐसे में किसी एक धार्मिक परंपरा से जुड़े प्रतीकों या प्रार्थनाओं को अनिवार्य करने से कुछ वर्गों में असहजता उत्पन्न हो सकती है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों की कमी, बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए।


इस विषय पर विशेषज्ञों की राय भी विभाजित दिखाई देती है। कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि गायत्री मंत्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है और इसे केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि इसका उद्देश्य नैतिक शिक्षा और बौद्धिक विकास है, तो यह छात्रों के लिए लाभकारी हो सकता है। दूसरी ओर कुछ संवैधानिक विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकारी संस्थानों में किसी भी प्रकार की अनिवार्यता लागू करते समय विविधता और धार्मिक स्वतंत्रता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। भारत जैसे बहुधार्मिक देश में संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।


भारत की शिक्षा व्यवस्था सदैव ज्ञान और संस्कार दोनों पर आधारित रही है। प्राचीन गुरुकुलों से लेकर आधुनिक विद्यालयों तक नैतिक शिक्षा को महत्वपूर्ण माना गया है। हालांकि आज का समाज अधिक विविध और बहुलतावादी है, इसलिए किसी भी नीति को लागू करते समय सभी समुदायों की भावनाओं और संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करना जरूरी है। यदि इस पहल का उद्देश्य वास्तव में छात्रों के व्यक्तित्व विकास, नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना है, तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी आवश्यक है कि विद्यालयों में समावेशी वातावरण बना रहे और किसी भी छात्र को अपनी धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान के कारण असहज महसूस न हो।


छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र को अनिवार्य करने का निर्णय शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार इसे भारतीय मूल्यों और नैतिक शिक्षा से जोड़कर देख रही है, जबकि विपक्ष इसे धर्मनिरपेक्षता और विविधता के दृष्टिकोण से चुनौती दे रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह पहल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और शैक्षणिक वातावरण पर कितना प्रभाव डालती है तथा समाज में इस विषय पर चल रही बहस किस दिशा में आगे बढ़ती है।



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