भारत तेजी से बदलती ऊर्जा आवश्यकताओं, बढ़ती जनसंख्या और लगातार बढ़ते पेट्रोलियम आयात के बीच एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हो गए हैं। दुनिया भर में जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं और भारत भी इस वैश्विक परिवर्तन का महत्वपूर्ण भाग बन चुका है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने भारत की पहली फ्लेक्स-फ्यूल कार ‘वैगन आर’ को पेश किया है।
यह केवल एक नई कार का लॉन्च नहीं है, बल्कि भारत के परिवहन क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत है। यह वाहन ई20 से लेकर ई100 तक विभिन्न एथनॉल मिश्रित ईंधनों पर चलने में सक्षम है। इसका अर्थ है कि वाहन मालिकों को भविष्य में पेट्रोल पर पूर्ण निर्भरता नहीं रखनी पड़ेगी और देश को भी महंगे कच्चे तेल के आयात से राहत मिल सकेगी।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से एथनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा देने के पक्षधर रहे हैं। उनका मानना है कि भारत के किसानों द्वारा उत्पादित गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से निर्मित एथनॉल देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का आधार बन सकता है। फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक इसी सोच का परिणाम है।
फ्लेक्स-फ्यूल ऐसी तकनीक है जिसमें वाहन का इंजन विभिन्न अनुपातों में पेट्रोल और एथनॉल के मिश्रण पर चल सकता है। सामान्यतः पारंपरिक वाहन सीमित मात्रा तक ही एथनॉल मिश्रित ईंधन स्वीकार कर पाते हैं, जबकि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ई20, ई50, ई85 और यहां तक कि ई100 तक पर भी आसानी से संचालित हो सकते हैं।
यह तकनीक नई नहीं है। ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन वर्षों से उपयोग में हैं। विशेष रूप से ब्राजील ने एथनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था विकसित कर विश्व के सामने एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। भारत में अब तक अधिकांश वाहन केवल पेट्रोल या सीमित एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलते थे। वैगन आर फ्लेक्स-फ्यूल इस स्थिति को बदलने की क्षमता रखती है।
एथनॉल एक जैव ईंधन (बायोफ्यूल) है जो कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। भारत में इसका उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के शीरे, गन्ने के रस, मक्का तथा अन्य कृषि अवशेषों से किया जाता है। एथनॉल उत्पादन के प्रमुख स्रोत है गन्ना, मक्का, चावल, ज्वार, टूटे हुए अनाज, कृषि अपशिष्ट। इन संसाधनों से तैयार ईंधन न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।
मारुति सुजुकी द्वारा पेश की गई नई वैगन आर फ्लेक्स-फ्यूल कई आधुनिक तकनीकों से लैस है। इस वाहन में अत्याधुनिक इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) लगाई गई है। यह सिस्टम ईंधन में एथनॉल की मात्रा को पहचानकर इंजन के प्रदर्शन को स्वतः समायोजित करता है। एथनॉल आधारित ईंधन के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। इससे वायु प्रदूषण कम करने में सहायता मिलेगी। यह वाहन ई20 से लेकर ई100 तक किसी भी मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं। जब देश में एथनॉल स्टेशन बढ़ेंगे, तब यह वाहन बिना किसी अतिरिक्त संशोधन के उनका उपयोग कर सकेगा।
नितिन गडकरी लंबे समय से वैकल्पिक ईंधनों के समर्थक रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा है कि भारत को पेट्रोल और डीजल आयात पर अत्यधिक निर्भरता से बाहर निकलना होगा। उनके अनुसार एथनॉल किसानों की आय बढ़ाएगा। विदेशी मुद्रा की बचत होगी। प्रदूषण कम होगा। ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। गडकरी का मानना है कि यदि भारत व्यापक स्तर पर एथनॉल आधारित परिवहन प्रणाली अपनाता है तो यह कृषि और उद्योग दोनों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इसके कारण विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ता है। भू-राजनीतिक संकटों से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यदि एथनॉल का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ता है, तो तेल आयात पर निर्भरता कम होगी।
फ्लेक्स-फ्यूल नीति का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिल सकता है। गन्ना और मक्का उत्पादकों को नया बाजार मिलेगा। एथनॉल उद्योग की मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में डिस्टिलरी और प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रगति की है। जहां कुछ वर्ष पहले पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण केवल 1-2 प्रतिशत था, वहीं अब देश कई क्षेत्रों में 20 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। सरकार ने एथनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए नई डिस्टिलरियों को मंजूरी दी। वित्तीय सहायता प्रदान की। खरीद मूल्य निर्धारित किए और निजी निवेश को प्रोत्साहित किया।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घोषणा की है कि दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, पुणे और नागपुर में 50 से 100 एथनॉल ईंधन स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार की योजना है कि 2026 तक 500 स्टेशन और 2027 तक 5000 स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। यदि यह लक्ष्य प्राप्त होता है तो भारत में एथनॉल आधारित परिवहन व्यवस्था को व्यापक आधार मिल जाएगा।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक केवल आर्थिक नहीं बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसके लाभ होंगे ग्रीनहाउस गैसों में कमी, कार्बन उत्सर्जन में कमी, वायु प्रदूषण में कमी और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम। जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के अनेक लाभ हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। देशभर में पर्याप्त एथनॉल स्टेशन स्थापित करना होगा। बढ़ती मांग के अनुरूप एथनॉल उत्पादन बढ़ाना होगा। नई तकनीक वाले वाहनों की कीमत प्रारंभ में अधिक हो सकती है। लोगों को फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के लाभ समझाने होंगे।
भारत का परिवहन क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन ईंधन, सीएनजी, बायोगैस और अब फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक देश को ऊर्जा विविधता प्रदान कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहन भारतीय सड़कों पर आम दृश्य बन सकते हैं। यदि सरकार की एथनॉल नीति सफल रहती है, तो भारत विश्व के उन देशों में शामिल हो सकता है जिन्होंने कृषि आधारित ईंधन को सफलतापूर्वक परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बनाया।
मारुति सुजुकी की फ्लेक्स-फ्यूल वैगन आर केवल एक नई कार नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, किसानों की समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल देश को तेल आयात की निर्भरता से आंशिक मुक्ति दिलाने, विदेशी मुद्रा बचाने और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती है। यदि सरकार, उद्योग और किसान मिलकर इस दिशा में कार्य करें तो आने वाला दशक भारत के लिए एथनॉल क्रांति का दशक साबित हो सकता है। वैगन आर फ्लेक्स-फ्यूल उसी क्रांति की पहली महत्वपूर्ण दस्तक है, जो भारतीय परिवहन क्षेत्र के भविष्य को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
